झारखंड में पिछड़ों के हक पर तकरार: रिपोर्ट दबाने पर केंद्र सख्त, पेसा जिलों में शून्य आरक्षण का मुद्दा गरमाया

रांची: झारखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान...

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पेसा जिलों में शून्य आरक्षण का मुद्दा गरमाया

रांची: झारखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान तेज हो गई है. मंगलवार को मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए.

लंबित रिपोर्ट पर नाराजगी

साध्वी निरंजन ज्योति ने खुलासा किया कि राज्य सरकार से जुलाई 2025 में ओबीसी की श्रेणियों (ग्रेड 1-4) में भागीदारी को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी, जो अब तक अप्राप्त है. उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब डेटा पारदर्शी हो.

केंद्रीय सूची में शामिल होंगी 36 जातियां

राज्य सूची की 36 पिछड़ी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा हुई. ओबीसी केंद्रीय अध्यक्ष रमेश साहु ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लातेहार, गुमला और सिमडेगा जैसे सात पेसा जिलों में ओबीसी आरक्षण को शून्यकर दिया गया है और वहां जाति प्रमाण पत्र बनना भी बंद हो गया है. बैठक में मांग उठी कि महिला आरक्षण से पहले राज्य में जाति गणना सुनिश्चित की जाए ताकि पिछड़ों का वाजिब हक तय हो सके. आयोग ने संकेत दिए हैं कि यदि डेटा उपलब्ध कराने में देरी हुई, तो सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.

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