NewsWave Desk : देश में E-20 के इस्तेमाल को लेकर ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चंद्र कुमार जैन ने लोगों से अपील की है वे किसी भी गलहफहमी में न आयें. E-20 के इस्तेमाल से वाहन में खराबी और माइलेज में कमी जैसी बातों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इस तरह के तर्क के पीछे कोई टेक्निकल आधार नहीं है. सरकार बहुत समझदार है. बेवकूफ नहीं है. वो कोई भी फैसला बगैर किसी आधार और भविष्य हित को ध्यान में रखते हुए ही लेगी. एथेनॉल फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पर चार साल तक स्टडी की है. नीति आयोग ने कहा है कि माइलेज में दो से चार फीसदी की कमी आ सकती है. लेकिन ये सामान्य प्रक्रिया है. ट्रैफिक रेड लाइट के दौरान भी इसमें कमी होती है.
नयी पॉलिसी में 20 प्रतिशत एथेनॉल युक्त पेट्रोल की जानकारी दी गयी
पूरा मामला E-20 से जुड़ा है. जहां 20 प्रतिशत एथेनॉल वाले फ्यूल को लेकर लोगों के बीच विवाद है. सरकार की नई पॉलिसी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलने की जानकारी दी गयी है. जिससे असर वाहन मालिकों के खराब होते माइलेज और इंजन के नुकसान से जुड़ा है. उपभोक्ता शुद्ध पेट्रोल का विकल्प न मिलने पर लगातार विरोध कर रहे है. इथेनॉल का विवाद माइलेज और महंगे ईंधन को लेकर भी है.



