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नागपुरी भाषा की पहचान गढ़ने वाली डॉ. कुमारी वासंती का निधन, विश्व हिंदू परिषद में शोक की लहर

Simdega / Ranchi: झारखंड के भाषाई आंदोलन की प्रखर आवाज और नागपुरी साहित्य जगत की आधारस्तंभ डॉ. कुमारी वासंती नहीं रहीं. रांची...

_Dr. Vasanti Kumari
डॉ. वासन्ती कुमारी फाइल फोटो

Simdega / Ranchi: झारखंड के भाषाई आंदोलन की प्रखर आवाज और नागपुरी साहित्य जगत की आधारस्तंभ डॉ. कुमारी वासंती नहीं रहीं. रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ वासंती ने रविवार को रांची के गुरुनानक अस्पताल में 77 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली. वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ थीं. उनके निधन से झारखंड के शैक्षणिक और सांस्कृतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई है.

अंतिम दर्शन और विदाई

डॉ. वासंती के निधन की सूचना मिलते ही साहित्यकारों और उनके शिष्यों का तांता लग गया. उनके पार्थिव शरीर को रांची के आईटीआई हेहल स्थित आवास पर लाया गया, जहां समाज के विभिन्न वर्गों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. डॉ. कुमारी वासंती केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि नागपुरी भाषा की एक संस्था थीं.

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विश्व हिंदू परिषद ने जताया गहरा शोक

डॉ. वासन्ती कुमारी के आकस्मिक निधन पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा गहरा शोक व्यक्त किया गया. जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, कि जिस प्रकार देश की मातृभाषा के रूप में हिंदी का महत्व है, उसी प्रकार छोटानागपुर क्षेत्र की मातृभाषा नागपुरी है, जिसे जन-जन तक पहुंचाने में डॉ. वासन्ती कुमारी का योगदान अतुलनीय रहा है. उन्होंने कहा कि डॉ. वासन्ती कुमारी ने अपने पूरे जीवनकाल में नागपुरी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए निरंतर कार्य किया. वे रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष रह चुकी थीं और झारखंड आंदोलन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा.

जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने कहा, कि उनके निधन से झारखंड को अपूरणीय क्षति हुई है. उन्होंने नागपुरी भाषा को एक नई पहचान और मुकाम दिलाया, जिसे सदैव याद रखा जाएगा. इस अवसर पर जिला अध्यक्ष के अलावा मंत्री कृष्णा शर्मा, कोषाध्यक्ष मुरारी प्रसाद, उपाध्यक्ष अघना खड़िया, किरण चौधरी, श्याम सुंदर मिश्रा, लहरु सिंह ,विद्यबंधु शास्त्री नारायण दास, मंत्री सुबोध महतो, कमल कुमार, बजरंग दल के जिला संयोजक आनंद जायसवाल, रामजी यादव, मानस प्रसाद, विकास साहू सहित अन्य लोगों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया.

सिमडेगा में होगा अंतिम संस्कार

मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. वासंती का अंतिम संस्कार उनके पैतृक निवास सिमडेगा में किया जाएगा. उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाने की तैयारी की जा रही है, जहां पूरे राजकीय सम्मान और भाषाई प्रेमियों की उपस्थिति में उन्हें विदाई दी जाएगी.

1949 से 2026 तक का सफर

13 मार्च 1949 को जन्मीं डॉ. कुमारी वासंती ने उस दौर में झारखंडी भाषाओं के लिए संघर्ष शुरू किया था, जब इन्हें मुख्यधारा में पहचान मिलना मुश्किल था. उन्होंने न केवल कक्षाओं में पढ़ाया, बल्कि सड़कों पर उतरकर झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को संवैधानिक सम्मान दिलाने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया. उनकी लिखी नागपुरी रचनाएं आज भी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा है. उनकी लेखनी ने क्षेत्रीय संवेदनाओं को आधुनिक साहित्य से जोड़ने का काम किया. टीआरएल विभाग की विभागाध्यक्ष के रूप में उन्होंने सैकड़ों शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया, जो आज झारखंड की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं.

रिपोर्ट: विकास साहू / रवि 

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