Saraikela: नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपुंगडीह परिसर में भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया. इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक सह भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य जटाशंकर पांडेय ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला.
शिक्षा, उद्योग और राष्ट्रीय एकता के पुरोधा थे डॉ. मुखर्जी
डॉ. जटाशंकर पांडेय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था. शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करते हुए वे कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने. स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनता संघ की स्थापना की, जो आगे चलकर देश की प्रमुख राजनीतिक शक्तियों में शामिल हुई.

‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’ का संदेश
डॉ. पांडेय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष व्यवस्था का विरोध करते हुए डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का उद्घोष किया था. उनका यह अभियान राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था. उन्होंने छात्रों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है.
राष्ट्र निर्माण का लिया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकगण, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया. इस अवसर पर एडवोकेट निखिल कुमार, प्राचार्य जयदीप पांडेय, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, शुभम साहू, शशि भूषण महतो, पवन महतो, कृष्णा पद महतो, गौरव महतो सहित संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
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