Bermo: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल स्थित निशन हाट पुलिया से मुर्गी फार्म खटाल के बीच डीवीसी ऐश पांड को जाने वाली पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य गुरुवार को एक बार फिर ठप हो गया. बेरमो एसडीएम मुकेश मछुआ द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी, स्थानीय पुलिस और जिला मुख्यालय से आए अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद गोविंदपुर के रैयतों और विस्थापितों के कड़े विरोध के कारण टीम को बैरंग लौटना पड़ा.
चार पाइपलाइन पहले से क्षतिग्रस्त, एक पर टिका पूरा सिस्टम
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऐश पांड को जाने वाली पांच पाइपलाइनों में से चार पिछले चार महीनों से क्षतिग्रस्त हैं. गोविंदपुर के रैयतों के विरोध के कारण प्रबंधन इन्हें बदलने या मरम्मत करने में असमर्थ है. फिलहाल केवल पाइपलाइन संख्या दो के सहारे ही ऐश स्लरी का निष्पादन हो रहा है, जिसके कभी भी फेल होने की आशंका है. यदि ऐसा होता है, तो डीवीसी को अपने 500 मेगावाट के पावर प्लांट को बंद करना पड़ सकता है.
विवाद की जड़ जमीन के अधिकार और नियोजन की मांग है. करीब 15 वर्ष पूर्व डीवीसी ने सीसीएल बोकारो-करगली प्रबंधन से मौखिक समझौते के तहत इस जमीन पर पाइपलाइन बिछाई थी. इसके बदले डीवीसी ने सीसीएल गोविंदपुर परियोजना को कोयला ट्रांसपोर्टिंग के लिए अपनी जमीन कोनार नदी के लोहा पुल से छिलका पुल तक दी थी.

मुआवजा और नियोजन को लेकर ग्रामीणों का विरोध, गतिरोध बरकरार
पाइपलाइन के जर्जर होने के कारण आए दिन फटने से खेतों में छाई का बहाव हो जाता है, जिससे रैयतों को नुकसान उठाना पड़ता है. करीब डेढ़ वर्ष पहले पाइप फटने के बाद खेतों में छाई जमा होने पर ग्रामीणों ने मुआवजे और 30 लोगों के नियोजन की मांग रखी थी. पूर्व की वार्ताओं में प्रबंधन ने 8 लोगों को काम दिया था, लेकिन बाद में तीन को हटा दिया गया और बाकी को भी स्थायी नियोजन नहीं मिला, जिससे आक्रोश बढ़ गया.
गुरुवार को जब दंडाधिकारी घनश्याम रजक, डीवीसी के वरीय प्रबंधक एचआर पार्थ सारथी मुखर्जी समेत अन्य अधिकारियों की टीम मरम्मत कार्य शुरू कराने पहुंची, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए. फलेंद्र महतो, जलेश्वर महतो, संजय महतो, भोला महतो, चंदू महतो और रीता देवी समेत ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक जमीन के वैध कागजात नहीं दिखाए जाते और 30 लोगों को नियोजन नहीं दिया जाता, तब तक कार्य नहीं होने दिया जाएगा.
बातचीत बेनतीजा, बिजली उत्पादन पर मंडराया संकट
अधिकारियों और रैयतों के बीच घंटों चली बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका. मौके पर मौजूद दंडाधिकारी ने भी स्वीकार किया कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हैं, जिसके कारण फिलहाल मरम्मत कार्य संभव नहीं हो सका. इस गतिरोध ने अब सीधे तौर पर डीवीसी के बिजली उत्पादन के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
