Ranchi: माटी की सेवा में पूरी जिंदगी खपाने के बाद जब आराम की बारी आई, तो अपनों के पास रहने या किसी और वजह से झारखंड के हजारों पेंशनधारियों ने दूसरे राज्यों का रुख कर लिया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड के 5,861 ऐसे पेंशनधारी हैं, जो देश के अलग-अलग 20 राज्यों में रहकर अपनी रिटायर्ड जिंदगी बिता रहे हैं. सरकार इन पेंशनधारियों के खातों में सालाना 38 करोड़ 72 लाख 16 हजार 657 रुपये की राशि पेंशन के रूप में सीधे ट्रांसफर कर रही है. इन कर्मियों का आशियाना बदल गया हो, लेकिन उनकी गाढ़ी कमाई का हक उन तक पूरी शिद्दत से पहुंच रहा है.

क्या है माइग्रेटेड पेंशन का ट्रेंड
इस ‘माइग्रेटेड पेंशन’ के ट्रेंड में सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला झुकाव पड़ोसी राज्य बिहार की तरफ है. झारखंड से रिटायर होने वाले कर्मचारियों का दिल सबसे ज्यादा बिहार के लिए धड़कता है. अकेले बिहार में 5,169 पेंशनधारी रह रहे हैं, जिन्हें झारखंड सरकार सालाना 35 करोड़ 76 लाख 99 हजार 592 रुपये का भुगतान कर रही है. कुल पेंशनधारियों का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले बिहार के खाते में जाता है.
पश्चिमबंगाल से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक झारखंड के पेंशनधारी
बिहार के बाद दूसरी सबसे बड़ी पसंद पश्चिम बंगाल बनकर उभरा है, जहां 456 पेंशनधारी रह रहे हैं और उन्हें 1 करोड़ 48 लाख 40 हजार 933 रुपये दिए जा रहे हैं. वहीं, पूर्वोत्तर का राज्य त्रिपुरा भी में 41 लोगों को 21 लाख 94 हजार 670 रुपये भेजे जा रहे हैं.अरुणाचल प्रदेश में 47 पेंशनधारियों को 40 लाख 13 हजार 532 रुपये, नागालैंड में 22 बुजुर्गों को 14 लाख 70 हजार 281 रुपये और मिजोरम में 21 लोगों को 8 लाख 50 हजार 18 रुपये का भुगतान हो रहा है. मध्य प्रदेश में बसे 26 लोगों को 14 लाख 85 हजार 179 रुपये दिए जा रहे हैं.
यूपी से लेकर हरियाणा तक
उत्तर प्रदेश में 19 पेंशनधारियों को 11 लाख 28 हजार 205 रुपये, छत्तीसगढ़ में 14 लोगों को 7 लाख 9 हजार 578 रुपये और असम में 13 पेंशनधारियों को 8 लाख 73 हजार 659 रुपये की राशि ट्रांसफर हो रही है. ओडिशा में बसे 9 बुजुर्गों को 6 लाख 7 हजार 232 रुपये, पंजाब में 4 लोगों को 1 लाख 81 हजार 466 रुपये और हरियाणा में 4 पेंशनधारियों को 1 लाख 34 हजार 215 रुपये मिल रहे हैं.
मेघालय से जम्मू कश्मीर तक
मेघालय में 3 लोगों को 78 हजार 814 रुपये, उत्तरांचल में 3 पेंशनधारियों को 3 लाख 63 हजार 258 रुपये और जम्मू-कश्मीर में रह रहे 3 पेंशनधारियों को 3 लाख 54 हजार 569 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. हिमाचल प्रदेश में 2 पेंशनधारियों को 55 हजार 294 रुपये, गुजरात में 2 लोगों को 47 हजार 498 रुपये और मणिपुर में 2 बुजुर्गों को 1 लाख 4 हजार 420 रुपये भेजे जा रहे हैं. सबसे कम आकर्षण राजस्थान के प्रति दिखा, जहां सिर्फ 1 पेंशनधारी रह रहा है और सरकार उन्हें 24 हजार 244 रुपये का भुगतान कर रही है.
