Saraikela : दक्षिण पूर्वी रेलवे के आंद्रा प्रमंडल के चांडिल जंक्शन स्टेशन पर 27 मई को केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री व सांसद संजय सेठ द्वारा चांडिल रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत हाईटेक बनाने की घोषणा को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा. साथ ही नेशनल हाईवे पर बनने वाले फ्लाईओवर तथा पितकी गेट और चांडिल गोलचक्कर स्थित फ्लाईओवर के संबंध में वन विभाग और दलमा इको सेंसिटिव जोन से NOC मिलने की खबर भी अखबारों में आई.


विकास की योजनाओं के बीच ESZ अधिसूचना पर बढ़ी चिंता
परंतु इन विकास योजनाओं के बीच लोग दलमा इको सेंसिटिव जोन के नाम पर चांडिल रेलवे स्टेशन से सटे NH-32 पर स्थित मकानों से संबंधित अधिसूचना को भूल गए. कुछ महीने पहले जारी वह अधिसूचना स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई थी. उसमें ESZ के दायरे में आने वाले निर्माणों को हटाने/रेगुलेट करने की चेतावनी दी गई थी.
सवाल यह है कि दलमा इको सेंसिटिव जोन के नाम पर समय-समय पर ऐसी अधिसूचना जारी कर चेतावनी क्यों दी जाती है? पर्यावरण मंत्रालय की 2012 की अधिसूचना के अनुसार दलमा वन्यजीव अभयारण्य के 10 किमी के दायरे को ESZ घोषित किया गया है. इसमें चांडिल का बड़ा हिस्सा आता है. ESZ में नई कॉलोनी, उद्योग, खनन व बड़े व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित हैं. पुराने निर्माणों को भी रेगुलेट किया जाना है.

हाथी कॉरिडोर बाधित होने से बढ़ी परेशानी
दलमा वन्य प्राणी विशेषज्ञों की मानें तो चांडिल स्टेशन के पास से गुजरने वाला NH-32 का यह इलाका पारंपरिक हाथी कॉरिडोर के रूप में चिन्हित है. पिछले सालों में दो-तीन बार हाथियों के दल ने इसी रास्ते से दलमा की ओर जाने का प्रयास किया था. लेकिन चांडिल रेलवे स्टेशन पर रेक में लगातार कोयले का परिचालन, स्टेशन की चहारदीवारी, बढ़ता शोर और हाईवे पर ट्रैफिक के कारण यह कॉरिडोर अब बाधित हो गया है.
कॉरिडोर बाधित होने के कारण अब हाथियों का दल अक्सर NH-33 बाईपास की तरफ निकल जाता है. इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं. पिछले साल NH-33 पर हाथियों के झुंड से टकराकर 2 लोगों की मौत हुई थी. वन विभाग का मानना है कि अगर पारंपरिक रास्ता साफ हो तो हाथी आबादी में नहीं घुसेंगे.
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रेलवे यार्ड में कोयला परिचालन और ESZ नियमों पर उठे सवाल
अब जब अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन का विस्तार, नए फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कें बनेंगी, तो ESZ नियम फिर आड़े आएंगे. एक तरफ विकास जरूरी है, दूसरी तरफ हाथी कॉरिडोर बचाना भी. वन विभाग ESZ का हवाला देकर निर्माण पर आपत्ति जता सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहले स्पष्ट करे कि ESZ में कौन से निर्माण मान्य हैं और कौन से नहीं. पुराने बसे लोगों को बेवजह परेशान न किया जाए. साथ ही हाथी कॉरिडोर को बचाने के लिए अंडरपास या एलिवेटेड रोड जैसे विकल्पों पर काम हो, ताकि विकास और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रहें. फिलहाल रेलवे और NHAI ने कहा है कि सभी प्रोजेक्ट वन एवं पर्यावरण विभाग की NOC लेकर ही किए जाएंगे.

“पूछता है चांडिल”: क्या हाथियों का स्टेशन चौक पर आना सिर्फ संयोग था?
विकास की योजनाओं और NOC की खबरों के बीच चांडिल के लोग एक बुनियादी सवाल पूछ रहे हैं- अगर दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का पारंपरिक हाथी कॉरिडोर बाधित नहीं हुआ है, तो फिर अब कोई हाथी NH-33 बाईपास पार कर दलमा की ओर जाता क्यों नहीं दिखता?
कुछ साल पहले की वह घटना लोग भूले नहीं हैं जब एक हाथी चांडिल रेलवे स्टेशन चौक पर आकर खड़ा हो गया था और भटकते-भटकते प्लेटफॉर्म तक पहुंच गया था. सवाल यही है कि रिहायशी इलाकों में हाथी का प्रवेश, खासकर स्टेशन चौक पर उसका घंटों खड़ा रहना और फिर प्लेटफॉर्म तक पहुंच जाना महज एक संयोग था, या फिर यह घटना हमें उनके बाधित कॉरिडोर की याद दिला रही थी?
वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि हाथी अपनी पीढ़ियों से तय रास्तों को कभी नहीं भूलते. जब उनका कॉरिडोर बंद होता है, तभी वे आबादी में भटकते हैं. चांडिल स्टेशन के पास से गुजरने वाला यह रास्ता सदियों से दलमा-बंदुआन कॉरिडोर का हिस्सा रहा है.
ESZ में प्रदूषण पर रोक, फिर भी कोयला परिचालन जारी
दलमा वन्य जीव अभयारण्य की अधिसूचना में साफ लिखा गया है कि इको सेंसिटिव जोन में प्रदूषण के कारक उद्योगों की स्थापना स्पष्ट रूप से प्रतिषेध यानी निषेध है. हवा, पानी और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां ESZ में नहीं हो सकतीं.
इसके बावजूद चांडिल रेलवे स्टेशन यार्ड में सालों से लगातार कोयले का लोडिंग-अनलोडिंग हो रहा है. कोयले की धूल, 24 घंटे चलने वाली मालगाड़ियों का शोर और तेज रोशनी ने हाथियों के प्राकृतिक रास्ते को बाधित किया है.
विडंबना यह है कि वन विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि, जो हाथी-मानव संघर्ष पर अक्सर चिंता जाहिर करते दिखते हैं, वे इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर मौन क्यों हैं?
- ESZ नियमों का उल्लंघन: अगर अधिसूचना में प्रदूषणकारी गतिविधि निषेध है, तो स्टेशन यार्ड में कोयला परिचालन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- कॉरिडोर बहाली की योजना कहां: वन विभाग ने हाथी कॉरिडोर को फिर से खोलने के लिए अंडरपास या ग्रीन ब्रिज जैसी क्या योजना बनाई?
- दोहरा मापदंड: जब आम लोगों के घरों पर ESZ के नाम पर नोटिस आता है, तो रेलवे की व्यावसायिक गतिविधि पर वही नियम लागू क्यों नहीं?
“चांडिल पूछ रहा है जवाब”
चांडिल के लोग पूछ रहे हैं कि क्या विकास सिर्फ इंसानों के लिए है? क्या अमृत भारत स्टेशन बनाते समय हाथियों के रास्ते का भी ध्यान रखा जाएगा? क्या कोयला यार्ड को स्टेशन से दूर शिफ्ट करने पर विचार होगा, ताकि दलमा के हाथियों को उनका पुराना रास्ता वापस मिल सके?
जब तक कॉरिडोर बहाल नहीं होता, तब तक हाथी NH-33 बाईपास पर भटकते रहेंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता रहेगा. जरूरत है कि वन विभाग, रेलवे और जनप्रतिनिधि मिलकर इस मुद्दे पर खुली चर्चा करें. क्योंकि अगली बार हाथी स्टेशन पर आए, तो शायद वह सिर्फ याद दिलाने नहीं, अपना हक मांगने आएगा.

