राजहरा कोयला खदान में रंगदारी का खेल! ई-ऑक्शन खरीदारों से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप

Ranchi: सीसीएल की राजहरा कोयला खदान में ई-ऑक्शन के जरिए कोयला खरीदने वाले कारोबारियों से संगठित तरीके से करोड़ों रुपये की रंगदारी...

Ranchi: सीसीएल की राजहरा कोयला खदान में ई-ऑक्शन के जरिए कोयला खरीदने वाले कारोबारियों से संगठित तरीके से करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय, कोयला मंत्रालय, झारखंड के मुख्य सचिव, DGP, NIA और CBI को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है. शिकायत में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया गया है.

गठजोड़ और नक्सली कनेक्शन का आरोप

शिकायत में सीसीएल कर्मियों, खनन अधिकारियों, पुलिस और स्थानीय अपराधियों के बीच गहरे गठजोड़ का आरोप लगाया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि इस अवैध वसूली का एक हिस्सा प्रतिबंधित नक्सली संगठन TPC तक पहुंच रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है.

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प्रति ट्रक तय रेट कार्ड से वसूली

शिकायत के अनुसार खदान क्षेत्र में कोयला उठाने आने वाले ट्रांसपोर्टरों के लिए पूरा रेट कार्ड तय कर दिया गया है. लोडिंग पॉइंट पर प्रति ट्रक 6000 रुपये और वेट ब्रिज पर प्रति टन 230 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं. जो कारोबारी इस अवैध रकम का भुगतान नहीं करते हैं, उन्हें वाहन जब्त करने, मारपीट करने और जान से मारने तक की धमकी दी जाती है. इससे कारोबारियों में डर का माहौल बना हुआ है.

गुर्गों का नेटवर्क सक्रिय

मामले में खुलासा किया गया है कि इस पूरे रैकेट का संचालन पलामू जिले के पोखराहा और डालटनगंज क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा है. पंडवा और डालटनगंज इलाके में करीब 15 से 20 लोग सक्रिय हैं, जो सीधे ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से संपर्क कर नकद वसूली करते हैं.

सरकारी राजस्व पर असर

यह संगठित वसूली तंत्र केवल कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि सरकार को भी नुकसान पहुंचा रहा है. वैध खरीदार हतोत्साहित हो रहे हैं, कोयला आपूर्ति प्रभावित हो रही है और राजस्व में गिरावट की आशंका जताई जा रही है.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि NIA पहले ही चतरा जिले की मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं में टीपीसी को दी जाने वाली लेवी की जांच कर रही है. जांच में सामने आया था कि सीसीएल कर्मी, ट्रांसपोर्टर और बिचौलिए मिलकर उग्रवादियों तक करोड़ों रुपये पहुंचा रहे थे. इस मामले में कई आरोपियों की संपत्ति भी कुर्क की जा चुकी है.

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