पोस्टमार्टम कांग्रेस काः आखिर क्यों रूठ गए राधाकृष्ण किशोर, समिति बनने के बाद ही क्यों फूटा मंत्री जी का गुस्सा, क्या कांग्रेस में सबकुछ ठीक है? (1)

Akshay Kumar Jha Ranchi: कांग्रेस की तरफ से रविवार को नयी कमेटी बनते ही पार्टी अंदर ही अंदर सुलगने लगी. आखिरकार सोमवार...

Akshay Kumar Jha

Ranchi: कांग्रेस की तरफ से रविवार को नयी कमेटी बनते ही पार्टी अंदर ही अंदर सुलगने लगी. आखिरकार सोमवार को मंत्री राधाकृष्ण किशोर का गुस्सा फूट पड़ा. गुस्सा फूंटने का ब्लास्ट इतना जोरदार था कि उनके घर में उनके बेटे तक ब्लास्ट की चिंगारी पहुंची. बेटे प्रशांत किशोर ने नयी बनी कमेटी के सचिव पद से इस्तीफा दे दिया. आखिर ऐसा क्या हो गया कि मंत्री पद से सुशोभित राधाकृष्ण किशोर को ऐसा करना पड़ा. कांग्रेस और मीडिया से जुड़े लोगों ने इसकी पड़ताल करनी शुरू कर दी. कई लोगों ने कई तरह की बातें कही. पड़ताल में एक बात तो सच पायी गयी कि जिस तरह से पार्टी ने बड़ी कमेटी बनाते हुए तीन सौ से ज्यादा लोगों को खुश करने की कोशिश की है, वो मामला ही बैकफायर कर गया है. साथ ही इस बात का भी उद्भेदन हो गया है कि पार्टी में सबसे मजबूत कौन है.

कहीं बेटे को अच्छा पद ना मिलना तो नहीं थी वजह

कांग्रेस की ही कुछ लोगों का कहना है कि राधाकृष्ण किशोर के बेटे प्रशांत किशोर को मनचाहा पद नहीं मिलने की वजह से मंत्री जी गुस्सा हो गए. बताया जा रहा है कि पहले मंत्री जी चाहते थे कि उनके बेटे को एससी विभाग का अध्यक्ष बना दिया जाए. लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. केदार पासवान को कुर्सी मिल गयी. इससे पहले प्रशांत को जिलाध्यक्ष भी नहीं बनाया गया था. और अब, जब जेनेरल सेक्रेटरी बनाने का मौका आया तो उन्हें कमेटी में सचिव के पद से नवाज दिया गया. ऐसे में भला एक पिता का गुस्सा होना लाजिमी बताया जा रहा है. नहीं तो 42 दिनों के बाद अचानक योगेंद्र साव की याद कैसे किसी को आ सकती है.

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क्या अध्यक्ष और प्रभारी की पार्टी पर है मजबूत पकड़?

कांग्रेस की तरफ से बनी 350 लोगों की कमेटी में कम से कम 50 से ज्यादा गलतियां हैं. ऐसा पार्टी के ही कुछ बोल रहे हैं. साथ में उनका यह भी कहना है कि प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की पार्टी पर कितनी पकड़ है, वो भी जगजाहिर हो गया. दबे जबान से कांग्रेस के लोग कह रहे हैं कि पार्टी पर असली पकड़ प्रदीप बालमुचू और धीरज साहू का हो गया है. केशव महतो और के राजू सब जानते हुए भी अनसुना कर देते हैं. सरकार के स्तर पर हो रही बैठकों में इस बात को साफ तौर से देखा जा सकता है. मसलन पार्टी के शीर्ष नेता ही पार्टी को कमजोर बनाने पर तुले हैं. साथ ही लोगों का यह भा आरोप है कि पार्टी के शीर्ष नेता बड़े मामलों में स्टैंड भी नहीं ले रहे हैं.

जारी…

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