Bokaro : डीवीसी मुख्यालय प्रबंधन द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनरों के क्वार्टरों के रेंट में 1 अप्रैल से 60 गुना तक की अप्रत्याशित बढ़ोतरी किए जाने से स्थानीय स्तर पर तीव्र असंतोष और आक्रोश पनप रहा है. प्रबंधन के इस तुगलकी फरमान ने उन बुजुर्गों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस संस्थान को सींचने में लगा दी. बुढ़ापे के इस पड़ाव पर, जहां उन्हें सम्मान और सहूलियत मिलनी चाहिए थी, वहां उन्हें अपने ही आशियाने से बेदखल होने या भारी-भरकम राशि चुकाने पर मजबूर किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अमानवीय है. बोकारो थर्मल के स्थानीय प्रभावित पेंशनरों में से रमाकांत सिंह, राम सेवक पांडेय, रंजीत सिंह, धरम सिंह, जानकी महतो आदि का कहना है कि पूर्व में जो रेंट बेहद सामान्य और उनके बजट के अनुकूल था, उसे बिना किसी ठोस आधार या पूर्व सूचना के सीधे साठ गुना बढ़ा दिया गया है. मासिक पेंशन का एक बड़ा हिस्सा महज आवास के किराए में कट जाने के कारण अब बुजुर्गों के पास दवाओं, दैनिक राशन और अन्य आवश्यक घरेलू खर्चों के लिए बेहद सीमित राशि बच रही है. कई मामलों में तो पेंशनरों को मिलने वाली नाममात्र की राशि का एक बड़ा हिस्सा इस बढ़े हुए रेंट की भेंट चढ़ जा रहा है, जिससे उनके सामने सीधे तौर पर जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है. इस अप्रत्याशित वित्तीय कटौती से न केवल पेंशनर,बल्कि उनके आश्रित परिवार भी गहरे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं.
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रेंट कम करने की मांग
इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ित पेंशनरों की नजरें डीवीसी के नवनियुक्त चेयरमैन गुरदीप सिंह पर टिक गई हैं. पेंशनर समाज और स्थानीय लोगों ने नए चेयरमैन से इस संवेदनशील मामले में तत्काल व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है. बुजुर्गों का कहना है कि संस्थान के शीर्ष नेतृत्व को यह समझना होगा कि पेंशनर कोई व्यावसायिक किराएदार नहीं हैं, बल्कि वे डीवीसी परिवार के ही अभिन्न अंग हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी इस बिजलीघर को अपनी सेवाएं दी हैं. नए चेयरमैन से जनहित में यह पुरजोर अपील की जा रही है कि इस साठ गुना बढ़े हुए अव्यावहारिक किराए को तत्काल वापस लिया जाए या इसे न्यूनतम और तार्किक स्तर पर लाकर बुजुर्गों को राहत दी जाए, ताकि वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव को बिना किसी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के गरिमा के साथ जी सकें. कहा कि यह कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है कि एक कमरे वाले डारमेटरी का रेंट लगभग 30 हजार रुपये काटा जाय. कहा कि डीवीसी के नये चेयरमैन पेंशनरों के मामले पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर बढ़ाये गये रेंट को कम करने की मांग की है.
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