Hazaribagh: बरकट्ठा प्रखंड के महाबर पहाड़ और कपका-कुरचुनो बेड़ो पुल के समीप विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ भारतीय गिद्ध का झुंड देखा गया है. वन विभाग के अनुसार, यह क्षेत्र में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है. बरकट्ठा के फॉरेस्टर पंकज कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में भारतीय गिद्धों की अच्छी संख्या देखी जा रही है. इनमें कम उम्र के गिद्ध भी शामिल हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि इस इलाके में उनका प्राकृतिक आवास सुरक्षित है और वे यहां सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहे हैं. महाबर पहाड़ लंबे समय से इन गिद्धों का स्थायी आश्रय स्थल रहा है.
99 प्रतिशत तक घट चुकी है गिद्धों की आबादी
वन विभाग के अनुसार, एक समय भारत में करोड़ों की संख्या में पाए जाने वाले गिद्ध आज विलुप्ति के मुहाने पर पहुंच चुके हैं. पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक दवा और भोजन की कमी को इनकी आबादी में भारी गिरावट का प्रमुख कारण माना जाता है. इसके चलते देश में गिद्धों की संख्या में करीब 99 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है और अब इनकी संख्या महज कुछ हजार ही रह गई है.
देश में गिद्धों की नौ प्रजातियां, कई अत्यधिक संकटग्रस्त
भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार, देश में गिद्धों की कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाला गिद्ध, पतली चोंच वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध अत्यधिक संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे समय में बरकट्ठा वन क्षेत्र में इनकी सक्रिय मौजूदगी संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
वन विभाग ने लोगों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है. विभाग ने कहा है कि जंगलों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि से बचें और यदि कहीं गिद्धों का झुंड या उनका घोंसला दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
