Ranchi: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी. तिब्बत की ओर से आया तेज पानी भोटे कोशी नदी में पहुंचा, जिसके बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया. तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी इलाकों में बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिला. सड़क, पुल और दूसरी सरकारी व निजी संपत्तियां पानी की चपेट में आ गईं. कई लोगों के लापता होने की भी सूचना है और राहत-बचाव अभियान जारी है. नेपाल में आई इस बाढ़ ने अब बिहार की चिंता भी बढ़ा दी है. इसकी सबसे बड़ी वजह भोटे कोशी से लेकर गंडक तक जुड़ा नदी तंत्र है. भोटे कोशी और त्रिशूली नदी का जल तंत्र आगे नारायणी नदी से जुड़ता है. यही नारायणी भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी कहलाती है और बिहार के कई जिलों से होकर गुजरती है. हालांकि, नेपाल में आई बाढ़ का पानी तुरंत बिहार में बाढ़ की स्थिति पैदा कर देगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी. बिहार पर असर पानी की मात्रा, रास्ते में दूसरी नदियों के बहाव, बारिश और बैराजों की स्थिति पर निर्भर करेगा.

नेपाल में अचानक कैसे आई बाढ़?
बुधवार सुबह करीब 9 बजे रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी पहुंचा. नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया. शुरुआती आकलन में बर्फीले मलबे के कारण नदी का रास्ता बाधित होने और फिर अचानक टूटने की आशंका जताई गई है. बाढ़ ने तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त या बह गए. बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोगों के लापता होने की सूचना है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं.
तिब्बत से बिहार तक पानी का क्या है रास्ता?
नेपाल से आने वाले पानी का बिहार तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं है. यह कई नदियों और नदी तंत्र से होकर गुजरता है.
तिब्बत → भोटे कोशी → त्रिशूली → नारायणी → भारत में गंडक → बिहार → गंगा
भोटे कोशी तिब्बत की तरफ से नेपाल में प्रवेश करती है. आगे इसका जल तंत्र त्रिशूली नदी से जुड़ता है. त्रिशूली नदी नेपाल के कई हिस्सों से होकर आगे बढ़ती है. देवघाट के पास त्रिशूली और काली गंडकी का संगम होता है, जिसके बाद नदी को नारायणी कहा जाता है. नारायणी भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से जानी जाती है. इसके बाद यह बिहार के मैदानी इलाकों से गुजरते हुए हाजीपुर-सोनपुर क्षेत्र के पास गंगा में मिलती है.
इसी नदी कनेक्शन से बिहार की बढ़ी चिंता
नेपाल में अचानक बढ़े पानी का असर आगे चलकर नारायणी और फिर गंडक नदी के जलस्तर पर पड़ सकता है. यही वजह है कि बिहार में भी गंडक नदी की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है. नेपाल में भोटे कोशी के बाद त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है. जैसे-जैसे बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ेगा, उसके प्रभाव का आकलन करना आसान होगा. हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि नेपाल की बाढ़ से बिहार में तत्काल बाढ़ आ जाएगी. नेपाल से आने वाले पानी की वास्तविक मात्रा और अगले कुछ घंटों में नदी के बहाव की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण होगी.
बिहार के इन जिलों पर पड़ सकता है असर
अगर नेपाल से बड़ी मात्रा में पानी नारायणी और फिर गंडक नदी में पहुंचता है, तो बिहार के गंडक तटवर्ती जिलों में दबाव बढ़ सकता है. खासकर निचले इलाकों में जलभराव और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.
पश्चिमी चंपारण
गंडक नदी बिहार में पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र से जुड़ती है. यहां वाल्मीकिनगर बैराज बेहद महत्वपूर्ण है. नदी का जलस्तर बढ़ने पर आसपास के तटवर्ती और निचले इलाकों में दबाव बढ़ सकता है.
पूर्वी चंपारण
गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर जिले के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में पड़ सकता है. ज्यादा पानी आने की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.
गोपालगंज
गोपालगंज गंडक नदी के लिहाज से संवेदनशील जिलों में शामिल है. नदी में अचानक उफान आने पर निचले क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका रहती है.
सीवान
गंडक नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में पानी बढ़ने पर सीवान के निचले और सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी जरूरी होगी.
मुजफ्फरपुर
गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर मुजफ्फरपुर के पश्चिमी हिस्सों में देखने को मिल सकता है. पानी ज्यादा बढ़ने पर जलभराव और कटाव की स्थिति बन सकती है.
सारण
गंडक नदी आगे सारण जिले से होकर हाजीपुर की तरफ बढ़ती है. इसलिए छपरा और आसपास के इलाकों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी होगा.
वैशाली
हाजीपुर के पास गंडक नदी गंगा में मिलती है. ऐसे में गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर नदी किनारे बसे इलाकों पर पड़ सकता है.
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क्या अभी बिहार में बाढ़ का खतरा है?
फिलहाल बिहार में तत्काल बाढ़ की स्थिति की घोषणा जैसी बात कहना जल्दबाजी होगी. नेपाल से निकलने वाला पानी बिहार तक पहुंचने से पहले कई नदी तंत्रों से होकर गुजरता है. इस दौरान पानी की मात्रा, बारिश, दूसरी नदियों का बहाव और बैराजों की स्थिति उसके प्रभाव को काफी हद तक तय करेगी. सबसे अहम बात यह है कि भोटे कोशी का पानी त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंच चुका है. अगर बड़ी मात्रा में पानी आगे नारायणी और फिर गंडक में पहुंचता है, तो बिहार में गंडक का जलस्तर बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली समेत गंडक के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ानी होगी.
वाल्मीकिनगर बैराज क्यों है महत्वपूर्ण?
गंडक नदी पर बना वाल्मीकिनगर बैराज बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह नदी के पानी के प्रबंधन के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाता है. नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा बढ़ने पर बैराज और गंडक नदी के जलस्तर पर विशेष निगरानी रखी जाती है. अगर नदी में अचानक बड़ी मात्रा में पानी पहुंचता है, तो तटवर्ती इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ सकता है.
अभी बिहार के लिए सबसे जरूरी क्या है?
फिलहाल सबसे जरूरी है कि नेपाल से आने वाले पानी और गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाए. नेपाल में बाढ़ की स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए अगले कुछ घंटे काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. अभी इसे बिहार में बाढ़ की दस्तक कहना सही नहीं होगा, लेकिन नेपाल और बिहार के बीच जुड़े नदी तंत्र को देखते हुए सतर्कता जरूरी है. अगर नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा बढ़ती है और उसका बड़ा हिस्सा नारायणी-गंडक नदी तंत्र में पहुंचता है, तो बिहार के गंडक किनारे बसे जिलों में इसका असर दिखाई दे सकता है.

