Meta पर लगा बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगाने का आरोप, अब बदले जाएंगे कई नियम

Newswave Desk: आजकल बच्चों का सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बन गया है. इसी बीच Facebook...

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Meta accused of addicting children to social media (AI IMAGE)

Newswave Desk: आजकल बच्चों का सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बन गया है. इसी बीच Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta पर बच्चों को सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देने का आरोप लगा है. अब इस मामले को खत्म करने के लिए Meta ने बड़ा समझौता किया है, जिसके तहत कंपनी बच्चों की सुरक्षा के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर कई बदलाव करने जा रही है.

क्या था पूरा मामला?

अमेरिका के कई राज्यों ने Meta के खिलाफ आरोप लगाया था कि Facebook और Instagram में ऐसे फीचर बनाए गए, जो बच्चों और किशोरों को ज्यादा समय तक ऐप पर बनाए रखते हैं. इससे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर पड़ने की बात कही गई. Meta ने इन आरोपों में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है.

Facebook और Instagram में होंगे बड़े बदलाव

समझौते के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram पर रोजाना 2 घंटे की डिफॉल्ट लिमिट होगी. इस लिमिट को हटाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी. दोनों ऐप्स पर बिताया गया समय इसी लिमिट में जोड़ा जाएगा. इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोर इन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन भी डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे.

लगातार 15 मिनट इस्तेमाल करने के बाद ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी मिलेगा. किशोरों के लिए पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की संख्या डिफॉल्ट रूप से छिपाई जाएगी. कुछ कॉस्मेटिक और एक्सट्रीम मेकअप फिल्टर भी प्रतिबंधित किए जाएंगे. साथ ही उम्र की पहचान करने वाली तकनीक और पैरेंटल कंट्रोल को मजबूत किया जाएगा.

Meta देगी 18 अरब डॉलर तक

समझौते के तहत Meta करीब 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करेगी. यह रकम अगले 10 साल में दी जाएगी. हालांकि करीब 30 फीसदी रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि YouTube और TikTok भी बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाते हैं या नहीं. फिलहाल समझौते को अदालत की मंजूरी मिलना बाकी है. लागू होने पर इसका असर अमेरिका में नाबालिग यूजर्स पर पड़ेगा. भारत में इसका सीधा कानूनी असर नहीं होगा, लेकिन बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दुनिया की दूसरी टेक कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

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