SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड में मानव तस्करी पर लगाम लगाने और लापता लोगों की सुरक्षित बरामदगी के लिए सीआईडी मुख्यालय ने एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के आलोक में उठाया गया है. सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य के मामले की सुनवाई के दौरान दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य के गृह विभाग ने डीजीपी महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव और सीआईडी के एडीजी को पत्र लिखकर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था. इसी आधार पर सीआईडी ने ठोस एक्शन प्लान तैयार कर राज्य के सभी जिलों के एसपी को क्रियान्वयन के लिए भेज दिया है.

एक्शन प्लान के 6 प्रमुख बिंदु, जानें पुलिस को क्या मिले निर्देश:
तत्काल एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य
किसी भी व्यक्ति या बच्चे के लापता होने की सूचना मिलने पर संबंधित पुलिस स्टेशन को बिना किसी देरी के तत्काल केस दर्ज करना होगा, हालांकि, यदि लापता व्यक्ति सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर मिल जाता है, तो जिले के एसपी के पास यह अधिकार होगा कि वे मामले को न्यायालय में आगे न बढ़ाएं और केस को वहीं समाप्त कर सकें.
नए कानूनी प्रावधानों के तहत मामला
दर्ज की जाने वाली एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की सुसंगत धाराओं को शामिल करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही बच्चों या वयस्कों के अपहरण और मानव तस्करी से संबंधित अन्य सभी कड़े कानूनी प्रावधानों को भी केस में जोड़ा जाएगा.
AHTU या स्पेशल यूनिट को केस ट्रांसफर
लापता होने के मामलों में यदि पुलिस को यह आशंका या पर्याप्त कारण नजर आता है कि मामला सीधे तौर पर मानव तस्करी या अपहरण से जुड़ा है, तो स्थानीय पुलिस को चार महीने की लंबी अवधि का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. ऐसे मामलों को तुरंत एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) या किसी अन्य विशेष इकाई को सौंप दिया जाएगा.
बरामदगी के बाद सुरक्षा और परिवार को सौंपने के नियम
जब भी कोई लापता व्यक्ति या बच्चा बरामद होता है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित सत्यापन के बाद उसे जल्द से जल्द उसके वैध अभिभावक या परिवार को सौंप दिया जाएगा. यदि जांच के दौरान यह पता चलता है कि मानव तस्करी या गायब करने में खुद परिवार या अभिभावक की संलिप्तता है, तो पीड़ित को उनके हवाले नहीं किया जाएगा. ऐसी स्थिति में पीड़ित की देखभाल और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बाल कल्याण समिति को सौंपी जाएगी.
बायोमेट्रिक और पहचान पत्र का सत्यापन
लापता व्यक्ति या बच्चे के बरामद होते ही आधिकारिक एजेंसी के माध्यम से उसके बायोमेट्रिक का तत्काल सत्यापन कराया जाएगा. यदि बरामद व्यक्ति के पास कोई पहचान पत्र या विशिष्ट पहचान संख्या नहीं है, तो उसे तुरंत बनवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश इसलिए दिया है ताकि उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) और बायोमेट्रिक डेटा के जरिए पीड़ित की ट्रैकिंग और पहचान आसानी से संभव हो सके.
DC और DCPU के माध्यम से समन्वय
जिस जिले में लापता व्यक्ति या बच्चा बरामद होगा, वहां की जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) अपने कानूनी दायित्वों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निर्वहन करेगी. किसी भी अन्य एजेंसी या यूनिट से सहयोग की आवश्यकता होने पर, जिला कलेक्टर या डीसी के माध्यम से आपसी समन्वय स्थापित कर आगे की त्वरित कार्रवाई की जाएगी.


