Ajay Dayal
Ranchi: राजधानी रांची में अपराधियों को दबोचने का दावा करने वाली खाकी के सामने दो ऐसे गंभीर मामले हैं, जो जून 2026 में भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं. रांची पुलिस की नाक के नीचे हुए दो सनसनीखेज हत्याकांडों में सालों बाद भी अपराधी गिरफ्त से बाहर हैं.
एक मामला 55 वर्षीय महिला फल विक्रेता दुलारी देवी की हत्या का है, जिसमें चार साल से ज्यादा समय बीत चुका है. वहीं दूसरा मामला शहर के टायर व्यवसायी गोपाल प्रसाद श्रीवास्तव का है, जिन्होंने हमले के दौरान बहादुरी दिखाते हुए अपराधी से हथियार तक छीन लिया, लेकिन ढाई साल बाद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है. सवाल यह है कि हाईटेक होने का दावा करने वाली रांची पुलिस की जांच इन दोनों ब्लाइंड मर्डर में क्यों विफल साबित हो रही है.
Case-1: चिरौंदी बाजार का ‘खूनी रविवार’, जहां तमाशबीन बनी रही भीड़ और नाकाम रही पुलिस
- तारीख: 27 मार्च 2022 (रविवार, देर शाम)
- स्थान: बरियातू थाना क्षेत्र, चिरौंदी बाजार
- पीड़िता: दुलारी देवी (55 वर्ष, फल विक्रेता)
चार साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दुलारी देवी की हत्या की गूंज आज भी न्याय की मांग कर रही है. घटना के समय वह बाजार बंद होने के बाद अपने बचे हुए फल समेटकर घर लौट रही थीं, तभी बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं.
यह वारदात भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई, फिर भी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार किसी ने भी अपराधियों को स्पष्ट रूप से नहीं देखा. पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले और जमीन विवाद के एंगल पर जांच भी की, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका. नतीजतन, यह केस आज भी अनसुलझा है.
Case-2: जब मौत से भिड़ गया जांबाज कारोबारी, लेकिन उसकी शहादत का कर्ज नहीं चुका पाई खाकी
- तारीख: 11 दिसंबर 2023 (मृत्यु: 14 दिसंबर 2023)
- स्थान: रातू रोड, लाहकोठी के पास
- पीड़ित: गोपाल प्रसाद श्रीवास्तव (टायर व्यवसायी, वंश इंटरप्राइजेज)
यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एक नागरिक की बहादुरी और पुलिस जांच की विफलता की कहानी है. रात करीब 9 बजे जब गोपाल प्रसाद दवा लेने रुके, तभी घात लगाए अपराधियों ने उन पर तीन गोलियां चला दीं. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और आरोपी से हाथापाई कर उसकी पिस्टल तक छीन ली. उन्हें गंभीर हालत में RIMS में भर्ती कराया गया, जहां 14 दिसंबर 2023 को उनकी मौत हो गई.
उनकी मौत के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला. टायर डीलर एसोसिएशन ने विरोध में अपर बाजार की दुकानें बंद कर दीं. शुरुआती जांच में पुलिस ने एक स्थानीय युवक से जुड़े विवाद का एंगल सामने रखा, लेकिन ढाई साल बाद भी केस अधूरा है. पुलिस के पास आरोपी की छीनी गई पिस्टल मौजूद है, लेकिन उसे चलाने वाले हाथों की पहचान आज तक नहीं हो सकी.
बड़ा सवाल: कब टूटेगी रांची पुलिस की रहस्यमयी खामोशी?
दुलारी देवी का परिवार आज भी न्याय की उम्मीद में है, वहीं गोपाल प्रसाद श्रीवास्तव के परिजन सवाल कर रहे हैं कि आखिर अपराधियों को किसका संरक्षण प्राप्त है. क्या ये केस हमेशा के लिए फाइलों में दबकर रह जाएंगे या पुलिस कभी इन ब्लाइंड मर्डर का सच सामने लाएगी? राजधानी की जनता और पीड़ित परिवार अब सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं – ठोस कार्रवाई और इंसाफ.
ALSO READ: कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की समीक्षा, किसानों को समयबद्ध लाभ पहुंचाने का निदेश



