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‘दर्द से लोकतंत्र तक’ बेटी के इंसाफ की लड़ाई में मां की बढ़त, भावनाओं की जीत की ओर बढ़ता जनादेश

Bengal elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक सीट सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि दर्द, न्याय और भावनाओं का प्रतीक बन...

Bengal elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक सीट सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि दर्द, न्याय और भावनाओं का प्रतीक बन गई है. साल 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. उस घटना की टीस आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है और अब वही दर्द लोकतंत्र के जरिए आवाज बनकर उभर रहा है. भारतीय जनता पार्टी ने पानीहाटी सीट से पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को एक अलग ही दिशा दे दी. यह सिर्फ एक राजनीतिक दांव नहीं, बल्कि उस मां की लड़ाई है, जिसने अपनी बेटी को खोया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी.

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यहां मुद्दा “नारी सुरक्षा और न्याय” का बन गया

ताजा रुझानों में बीजेपी उम्मीदवार लगातार बढ़त बनाए हुए हैं. यह बढ़त सिर्फ वोटों की नहीं, बल्कि भावनाओं की जीत के रूप में देखी जा रही है. जनता मानो यह संदेश दे रही है कि न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. तृणमूल कांग्रेस ने भी इस सीट पर बड़ा बदलाव करते हुए पांच बार के विधायक का टिकट काटकर नया चेहरा उतारा, लेकिन इस बार मुकाबला पारंपरिक राजनीति से कहीं आगे निकल चुका है. यहां मुद्दा विकास या जातीय समीकरण नहीं, बल्कि “नारी सुरक्षा और न्याय” बन गया है.

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यह जीत एक मां के साहस की होगी

अगर यह रुझान नतीजों में बदलता है, तो यह जीत सिर्फ एक उम्मीदवार की नहीं होगी बल्कि यह एक मां के साहस, उसकी पीड़ा और उसकी उम्मीदों की जीत होगी. आज शायद वह मां बाहर से मजबूत दिख रही होगी, लेकिन अंदर कहीं न कहीं अपनी बेटी को याद कर रही होगी. ये जीत उसके लिए खुशी भी होगी और आंखों में छुपे आंसू भी. वो आंसू जो दुनिया से छुपे रहेंगे, लेकिन उसकी अंतरात्मा सब जानती है—उसकी बेटी के लिए, उसके इंसाफ के लिए, उसकी हर सांस आज भी एक लड़ाई है.

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