NewsWave Desk: हमारे समाज में अक्सर ऐसा माना जाता है कि लड़कों को बोलने और फैसले लेने का हक है, जबकि लड़कियों की अहमियत सिर्फ उनके रूप या घर संभालने में होती है. यह सोच दोनों के बीच भेदभाव बढ़ाती है और बराबरी खत्म कर देती है.
समाज में पुरुषों और महिलाओं की भूमिका
पुरुषों को बचपन से सिखाया गया है कि वे ताकतवर बनें, अपनी बात खुलकर कहें. इसी वजह से समाज में उनकी आवाज को ज्यादा महत्व दिया जाता है. दूसरी ओर, महिलाओं को उनके रूप-रंग और सुंदरता के आधार पर आंका जाता है. उनसे उम्मीद की जाती है कि वे घर-परिवार और रिश्तों को संभालें, लेकिन उनके काम या भावनाओं को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता.
भेदभाव के दुष्प्रभाव
ऐसी सोच से नुकसान यह होता है कि महिलाएं अपनी बात खुलकर नहीं कह पातीं और आत्मविश्वास खो देती हैं. वहीं, पुरुष भी अपनी भावनाएं छुपा लेते हैं .
समाज में जरूरी है कि हम यह सोच बदलें। हर किसी को चाहे वह लड़का हो या लड़की अपनी बात कहने, फैसले लेने और अपनी पहचान बनाने का बराबर हक मिलना चाहिए.
