Click Here
Click Here
Click Here

हजारीबाग : बड़कागांव में भूमि अधिकार की ‘महाजंग’, राहुल गांधी के दूत के. राजू बदलेंगे रैयतों की किस्मत, योगेंद्र साव ने खोला मोर्चा

Hazaribagh; हजारीबाग जिले का बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र 6 जुलाई को एक ऐतिहासिक राजनीतिक और सामाजिक हलचल का गवाह बनने जा रहा है....

Hazaribagh
Hazaribagh

Hazaribagh; हजारीबाग जिले का बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र  6 जुलाई को एक ऐतिहासिक राजनीतिक और सामाजिक हलचल का गवाह बनने जा रहा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के विशेष दूत और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू 6 जुलाई को बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू के विस्थापित और  प्रभावित क्षेत्रों के तूफानी दौरे पर आ रहे हैं. इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे को लेकर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के पूर्व विधायक योगेंद्र साव ने अपने बड़कागांव स्थित आवासीय कार्यालय में प्रेस वार्ता कर पूरी रूपरेखा साझा की और स्थानीय प्रशासन व माइनिंग माफियाओं के खिलाफ सीधे तौर पर जंग का ऐलान कर दिया.

‘लारा एक्ट 2013’ पर कड़ा रुख

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा रचित ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण कानून ‘लारा एक्ट 2013’ को वर्ष 2015 में झारखंड सरकार ने भी पारित कर दिया था. इसके बावजूद पिछले 10 वर्षों से बड़कागांव और केरेडारी के रैयत अपनी ही जमीनों के सही हक के लिए तरस रहे हैं . उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून बदल चुका है, तो आज भी कंपनियां 1957 के पुराने सीबी एक्ट यानी कोल बेयरिंग एक्ट के तहत औने-पौने दामों में जमीनें क्यों लूट रही हैं? योगेंद्र साव ने इसके लिए सीधे तौर पर जिले के उपायुक्त यानी कलेक्टर को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि कुछ अदृश्य माइनिंग माफिया और कॉरपोरेट के दलाल मिलकर रैयतों की आवाज़ को दबा रहे हैं और उनके जल-जंगल-ज़मीन की लूट मचाए हुए हैं.

राहुल गांधी के दूत की ‘जमीन पर चौपाल

पूर्व मंत्री ने बताया कि के. राजू कोई आम राजनेता नहीं हैं, बल्कि वे भारत सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी रह चुके हैं और मनरेगा व 2013 के लैंड एक्विजिशन बिल को अमलीजामा पहनाकर जनहित में बड़ा काम करने का उनका पुराना रिकॉर्ड रहा है। वे आज विस्थापितों के बीच सोफे पर नहीं, बल्कि सीधे ज़मीन पर बैठकर चौपाल लगाएंगे और विस्थापन के दर्द को समझेंगे.

इस प्रकार रहेगा कार्यक्रम 

दौरे की शुरुआत सुबह 09:00 बजे पतरातू से होगी, जहाँ वे चौबीस गांवों के विस्थापन और प्रदूषण के गंभीर मामलों की समीक्षा करेंगे. इसके बाद दोपहर 12:00 बजे वे अडानी समूह की गोंदलपुरा खनन परियोजना के प्रभावित रैयतों से सीधे रूबरू होंगे. वहाँ से चेपा खुर्द के विशाल मैदान में रैयतों और विस्थापितों के साथ बड़ी जनसभा और विस्थापन मुद्दों पर सीधी बात होगी. इसके बाद वे कंडाबेर पहुँचेंगे और एनटीपीसी के नॉर्थ ईस्ट पकड़ी बरवाडीह कोल माइन प्रोजेक्ट के प्रभावित ग्रामीणों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे.फिर केरेडारी कोल माइन प्रोजेक्ट के अंतर्गत आने वाले बेंगवारी और बसरिया बाजार में ग्रामीणों के बीच चौपाल सजेगी. शाम 04:00 बजे पगार में चट्टी बरियातू कोल माइन उत्खनन परियोजना के तहत विस्थापित हुए परिवारों का हाल जानेंगे और अंत में शाम 05:00 बजे चंद्रगुप्त परियोजना के तहत आने वाले पचड़ा पंचायत में रैयतों की अंतिम चौपाल लगेगी. इस सघन दौरे के तुरंत बाद के. राजू सीधे रांची रवाना होंगे, जहाँ रात 08:00 बजे की फ्लाइट से दिल्ली लौटकर वे अपनी विस्तृत खोजी रिपोर्ट राहुल गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे.

मुख्यमंत्री की पुरानी घोषणा की दिलाई याद

योगेंद्र साव ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन विपक्ष में रहते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री ने खुद विधानसभा के पटल पर गरजते हुए कहा था कि झारखंड की धरती पर रैयतों के दमन वाला एलए या सीबी एक्ट नहीं, बल्कि सिर्फ 2013 का नया भूमि कानून चलेगा. पूर्व विधायक ने हुंकार भरते हुए कहा कि के. राजू दिल्ली लौटकर मुख्यमंत्री से नेट-टू-नेट बात करेंगे और इस कानून को धरातल पर दो सौ प्रतिशत लागू कराकर रहेंगे, क्योंकि इस जनहित के कानून को खुद उन्होंने ही तैयार किया था.

विस्थापन की नब्बे प्रतिशत समस्याओं का हो जाएगा अंत 

जब पत्रकारों ने पूछा कि इस दौरे से बड़कागांव की जनता को क्या सौगात मिलेगी, तो योगेंद्र साव ने कहा कि 2013 का कानून लागू होते ही विस्थापन की नब्बे प्रतिशत समस्याओं का अंत हो जाएगा. इस कानून के तहत कमर्शियल, हाउसिंग, एग्रीकल्चरल और इंडस्ट्रियल जैसे चार रेट तय हैं. चूँकि यहाँ कंपनियां कोयला निकालकर व्यापार यानी कमर्शियल काम कर रही हैं, इसलिए रैयतों को कमर्शियल रेट के आधार पर बाजार मूल्य से सीधे चार गुना अधिक मुआवजा मिलेगा.उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पकड़ी बरवाडीह, चेपा, जुगरा, डाँड़ी सिन्दवारी, नगड़ी या आरा-हरा जैसे सुदूर ग्रामीण इलाकों में ज़मीन का सरकारी रेट कम भी है, तो भी उन्हें बड़कागांव मुख्य चौक के प्रति डिसमिल कमर्शियल रेट के मुकाबले चार गुना भारी-कम राशि दी जाएगी. इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता के लिए वर्तमान विधायक अंबा प्रसाद और खुद योगेंद्र साव लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर जनता को जागरूक कर रहे हैं और आज की इस महा-चौपाल में हज़ारों-हज़ार की संख्या में विस्थापितों के जुटने की पूरी संभावना है.

ALSO READ :पलामू : कारगिल विजय दिवस की तैयारियां तेज, 26 जुलाई को शहीद स्मारक पर माल्यार्पण और वीर परिजनों का होगा सम्मान

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *