Hazaribagh : झारखंड और बिहार की सीमाओं के बीच सक्रिय मानव तस्करों और देह व्यापार के एक ऐसे खौफनाक जाल का पर्दाफाश हुआ है, जो सीधे तौर पर गरीब और कम पढ़ी-लिखी ग्रामीण बच्चियों को अपना शिकार बना रहा है. बिहार के नवादा जिला अंतर्गत रजौली थाना क्षेत्र की रहने वाली एक अत्यंत गरीब परिवार की बच्ची को काम दिलाने का झांसा देकर हजारीबाग के रसूलगंज इलाके में बंधक बना लिया गया. पूरे 15 दिनों तक वह तस्करों के चंगुल में नरकीय यातनाएं झेलती रही, जहां उस पर न सिर्फ देह व्यापार के लिए दबाव बनाया गया, बल्कि जबरन धर्म परिवर्तन की नीयत से उर्दू पढ़ाने की कोशिश भी की गई. आखिरकार कोडरमा (मेघातरी) के कुछ जांबाज सामाजिक युवाओं की सूझबूझ से उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है.
‘कार्टून पैकिंग का काम’ और बस में बुना गया साजिश का ताना-बाना
इस खौफनाक कहानी की शुरुआत कुछ दिन पहले एक बस सफर के दौरान हुई थी. पीड़ित बच्ची ने बताया कि बस में सफर के दौरान एक बड़ी उम्र की महिला से उसकी जान-पहचान हुई, जिसने खुद को मुसीबत में बताकर बच्ची से मदद मांगी थी. इसी दोस्ती का फायदा उठाकर उस महिला ने बच्ची को बहलाया-फुसलाकर कहा कि ‘शहर चलो, वहां बहुत अच्छा कार्टून पैकिंग का काम दिला दूंगी. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्ची बिना माता-पिता को बताए उसके साथ निकल गई. लेकिन हजारीबाग पहुंचते ही उस महिला ने बच्ची को एक गिरोह के हवाले कर दिया और खुद गायब हो गई. चंगुल से छूटकर आई पीड़िता ने बंद कमरे के भीतर का जो खौफनाक मंजर बयां किया, वह रोंगटे खड़े करने वाला है. बताया कि वहां मुझे एक कमरे में बंद कर दिया गया. सुबह 1:00 बजे और रात को 12:00 बजे जैसे-तैसे खाना दिया जाता था. नौ लड़के हमेशा मेरे आगे-पीछे पहरा देते थे. वे लोग मुझे जबरदस्ती उर्दू पढ़ाते थे, जो मुझे समझ नहीं आता था. वे मुझे लातों से पीटते थे और अनजान मर्दों से फोन पर गंदी-गंदी बातें करने का दबाव बनाते थे. जब मैं मना करती, तो कहते कि घर से ₹20,000 मंगाओ, नहीं तो जान से मारकर फेंक देंगे. उन्होंने मुझे सख्त हिदायत दी थी कि घरवालों को कभी अपना असली पता मत बताना.

मां का दर्द: बेटी को मत मारना, मैं जमीन बेचकर पैसे दे दूंगी
इधर घर से अचानक गायब हुई बेटी को ढूंढने में मां-बाप दर-दर भटक रहे थे. इसी बीच तस्करों के अड्डे से पीड़ित की मां के पास एक फिरौती का फोन आया. तस्करों ने सीधे शब्दों में कहा कि अगर अपनी बेटी को जिंदा देखना चाहती हो तो ₹80,000 का इंतजाम करो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो. मजदूरी कर किसी तरह अपनी 6 बेटियों का पेट पालने वाली असहाय मां ने उस वक्त तस्करों के सामने गिड़गिड़ाते हुए जो कहा, वह किसी भी संवेदनशील दिल को झकझोर देगा. मां ने कहा कि सर, हम तो बहुत गरीब लोग हैं, जंगल से ढिबड़ा चुनकर किसी तरह गुजर-बसर करते हैं. जब तस्करों का फोन आया तो मैं रोने लगी और उनके पैर पकड़े. मैंने कहा कि मेरी बेटी को मत काटना, उसे मत मारना. हमारी सेमानी में थोड़ी सी जमीन है, मैं उसे भी बेचकर जैसे-तैसे पैसे चुका दूंगी, बस मेरी बच्ची को सुरक्षित रख लो.
मोबाइल दुकान की चालाकी और फिल्मी स्टाइल में रेस्क्यू
पूरे घटनाक्रम में इस बच्ची ने खुद हिम्मत दिखाई. उसने अपने अपहरणकर्ताओं को झांसा दिया कि उसके पर्सनल फोन के UPI में पैसे हैं, अगर वे उसका फोन ठीक करवा दें तो वह पैसे निकाल कर दे देगी. तस्कर उसे हजारीबाग की एक मोबाइल दुकान पर ले गए. जब वे लोग खाना खाने के लिए थोड़े दूर हटे, तो पीड़िता ने दुकानदार के फोन से मेघातरी में रहने वाले अपने परिचितों को गुप्त रूप से फोन कर अपनी लोकेशन दे दी. सूचना मिलते ही मेघातरी के सामाजिक कार्यकर्ता सारस बबलू और मुन्ना तुरंत हरकत में आए और बिना वक्त गंवाए हजारीबाग के उस इलाके में धावा बोल दिया. युवकों को अचानक वहां देखकर तस्करों के गुर्गे मौके से खिसक गए और बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया. इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए रेस्क्यू करने वाले युवा सारस बबलू और मुन्ना ने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कहा कि यह बेहद संगठित और खतरनाक चक्रव्यूह है, जो गरीब ग्रामीण लड़कियों को देह व्यापार के दलदल में धकेल रहा है. हजारीबाग के रसूलीगंज का वह पूरा इलाका जहां बच्ची को रखा गया था, बेहद संवेदनशील था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उस ठिकाने पर सिर्फ यह बच्ची नहीं थी, बल्कि ऐसी कम से कम 20 और लड़कियां बंधक बनाकर रखी गई हैं. हमने दो दिन पहले ही रजौली थाने में आवेदन दिलवाया था, लेकिन पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई. अगर हम सही वक्त पर न पहुंचते, तो इस बच्ची के साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती थ. हम प्रशासन से मांग करते हैं कि उस पूरे अड्डे पर तुरंत छापेमारी कर बाकी 20 बच्चियों को भी इस नरक से आजाद कराया जाए.
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