Hazaribagh : विष्णुगढ़ में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सर्प मित्र सुरेश राम को हाल ही में अंधेरे में एक दुर्लभ ‘भगजोगनी’ (जुगनू) का लार्वा दिखाई दिया. अपने शरीर से प्राकृतिक प्रकाश उत्सर्जित करने वाले इस जीव को देखकर उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रकृति के छोटे-छोटे जीव भी पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
वर्षों से कर रहे हैं सांपों और वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू
सुरेश राम ने बताया कि वे कई वर्षों से विभिन्न प्रजातियों के सांपों और अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ते आ रहे हैं. उनका उद्देश्य लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ने से अब कई लोग वन्यजीवों को मारने के बजाय रेस्क्यू टीम को सूचना देने लगे हैं, लेकिन अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है. उन्होंने बताया कि विष्णुगढ़ और आसपास के कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या गंभीर है. कई बार लोग समय पर उनसे संपर्क नहीं कर पाते, जिसके कारण वन्यजीवों को बचाने का अवसर नहीं मिल पाता. हाल ही में इसी वजह से दो गेहुवन सांपों का समय पर रेस्क्यू नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई. उन्होंने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से नेटवर्क व्यवस्था में सुधार की भी मांग की.
डर नहीं, जागरूकता से बच सकती है वन्यजीवों की जान
सुरेश राम ने कहा कि अधिकांश लोग डर या जानकारी के अभाव में सांपों और अन्य वन्यजीवों को मार देते हैं. जबकि थोड़ी समझदारी और धैर्य से उनकी जान बचाई जा सकती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं, बल्कि प्रशिक्षित रेस्क्यूकर्ता या वन विभाग को तुरंत सूचना दें. उन्होंने बताया कि एक रेस्क्यू अभियान से लौटने के दौरान उनकी नजर अंधेरे में चमक रही करीब दो से तीन इंच लंबी आकृति पर पड़ी. पास जाकर देखने पर पता चला कि वह जुगनू का लार्वा था, जिसे स्थानीय भाषा में ‘भगजोगनी’ कहा जाता है. यह अपने शरीर से प्राकृतिक प्रकाश यानी बायोल्यूमिनेसेंस उत्सर्जित कर रहा था. उन्होंने बताया कि इस लार्वा को पूर्ण विकसित उड़ने वाले जुगनू में बदलने में लगभग एक से दो वर्ष का समय लगता है.
प्रदूषण और कृत्रिम रोशनी से बढ़ा खतरा
सुरेश राम ने चिंता जताई कि बढ़ते प्रदूषण, रासायनिक खेती, अत्यधिक कृत्रिम रोशनी और प्राकृतिक आवासों के लगातार नष्ट होने से जुगनू जैसे दुर्लभ जीव तेजी से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. यदि समय रहते इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी. सर्प मित्र सुरेश राम ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वन्यजीवों की रक्षा करना केवल जीवों को बचाना नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन और मानव जीवन के सुरक्षित भविष्य की रक्षा करना भी है. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि सांप या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर घबराने के बजाय जिम्मेदारी का परिचय दें और तत्काल प्रशिक्षित रेस्क्यूकर्ता या वन विभाग को सूचना देकर उनके संरक्षण में सहयोग करें.
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