हजारीबाग: PTC-मटवारी मार्ग पर नगर निगम की कार्रवाई पर भाकपा का कड़ा रुख, बिना नोटिस 40 फुटपाथ दुकानें ढहाने के खिलाफ जन आंदोलन का ऐलान

Hazaribagh: हजारीबाग नगर निगम के तानाशाही रवैये और दोहरी नीति के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने आर-पार के जन आंदोलन का...

PTC-मटवारी मार्ग पर नगर निगम की कार्रवाई पर भाकपा का कड़ा रुख,

Hazaribagh: हजारीबाग नगर निगम के तानाशाही रवैये और दोहरी नीति के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने आर-पार के जन आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. पीटीसी चौक से मटवारी गांधी मैदान मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी पूर्व सूचना या मुनादी के अचानक तकरीबन 40 फल एवं सब्जी की गुमटियों और दुकानों को जेसीबी से पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया. भाकपा के प्रदेश सचिव कॉ. महेंद्र पाठक और जिला सचिव कॉ. अनिरुद्ध कुमार ने नगर निगम की इस मनमानी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि निगम का अमानवीय और विरोधाभासी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है. उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की आड़ लेकर अंचल और निगम प्रशासन सिर्फ निर्दोष और गरीब दुकानदारों को निशाना बना रहा है, जबकि शहर के असली बड़े अतिक्रमकारी खुलेआम घूम रहे हैं. इस एकतरफा कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के दुकानदारों में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल व्याप्त है.

आनन-फानन में हुई तोड़फोड़, सामान बचाने के चक्कर में दो वेंडर लहूलुहान

नेताओं ने ग्राउंड जीरो का विवरण देते हुए बताया कि नगर निगम की यह कार्रवाई इतनी अप्रत्याशित और आनन-फानन में की गई कि गरीब दुकानदारों को अपनी पूंजी सुरक्षित करने का मौका तक नहीं मिला. दुकानों को टूटता देख जब फल-सब्जी विक्रेता मलबे से अपना सामान निकालने दौड़े, तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों द्वारा जबरन पीछे धकेला गया. इस धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच दो दुकानदार गंभीर रूप से चोटिल हो गए, जिसमें एक का पैर कट गया और दूसरे का हाथ जख्मी हुआ है. पीड़ितों ने रोते हुए बताया कि उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया गया. इस दमनकारी कार्रवाई के कारण दुकानदारों के लाखों रुपये के कीमती फल और सब्जियां मलबे के नीचे दबकर पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिससे उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है.

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: दिव्यांग फल विक्रेता से छीनी 5 मिनट की मोहलत

इस पूरे अभियान के दौरान प्रशासनिक संवेदनहीनता की सारी हदें उस वक्त पार हो गईं जब सड़क किनारे पिछले कई वर्षों से दुकान चला रहे दिव्यांग फल विक्रेता अजय के रोजगार पर बुलडोजर चलाया गया. बैसाखियों के सहारे टिके अजय ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा, “सर, मेरा पैर पहले से टूटा हुआ है, मैं जल्दी नहीं भाग सकता. मुझे अपनी जीविका का सामान हटाने के लिए सिर्फ 5 मिनट का वक्त दे दीजिए.” लेकिन क्रूर प्रशासनिक अमले ने उसकी एक न सुनी और उसकी आंखों के सामने उसकी तीनों दुकानों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया. आरोप यह भी है कि इस अमानवीय कृत्य का विरोध करने वाले और वीडियो बनाने वाले स्थानीय दुकानदारों के मोबाइल फोन भी अधिकारियों द्वारा जबरन छीन लिए गए.

बड़े होटलों, स्कूलों और मॉल्स के अवैध जाम पर मेहरबान है निगम प्रशासन

भाकपा जिला कमिटी ने नगर निगम पर चुनिंदा और भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने का सीधा आरोप लगाया है. नेताओं ने कहा कि पीटीसी और मटवारी चौक के समीप स्थित कुछ प्रभावशाली 12-13 दुकानों को छोड़कर केवल बीच के 25-30 निरीह गरीबों की दुकानें ही तोड़ी गईं. इस मार्ग पर स्थित बड़े-बड़े रसूखदार मॉल, विनायक होटल, फ्रंटियर होटल तथा नामचीन निजी शिक्षण संस्थानों के बाहर हर रोज मुख्य सड़क पर वाहनों का भारी जाम लगता है, लेकिन निगम प्रशासन इन रसूखदारों पर हमेशा मेहरबान रहता है. कॉ. अनिरुद्ध कुमार ने स्थानीय सांसद, विधायक और नगर निगम के अन्य प्रतिनिधियों की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने तुरंत अपनी मनमानी बंद नहीं की, पीड़ितों को उचित मुआवजा नहीं दिया और उन्हें चिह्नित वेंडिंग जोन देकर पुनर्वासित नहीं किया, तो भाकपा सड़क से लेकर न्यायालय तक एक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी.

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