हजारीबाग: 17 साल में भी पूरा नहीं हुआ अल्पसंख्यक छात्रावास, खंडहर में तब्दील हो रहा भवन

Hazaribagh: सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार और विभागीय लापरवाही का एक और मामला हजारीबाग में सामने आया है. खिरगांव क्षेत्र में अल्पसंख्यक...

Minority hostel
अल्पसंख्यक छात्रावास

Hazaribagh: सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार और विभागीय लापरवाही का एक और मामला हजारीबाग में सामने आया है. खिरगांव क्षेत्र में अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए बनाया जा रहा छात्रावास 17 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है. करीब एक करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई यह योजना अब अधूरे भवन और बदहाल परिसर के कारण सवालों के घेरे में है. जिस भवन का निर्माण जरूरतमंद विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह उपयोग में आने के बजाय धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है.

विद्यार्थियों को नहीं मिल सका योजना का लाभ

छात्रावास निर्माण का उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारीबाग में पढ़ाई करने आने वाले अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराना था. इससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निजी लॉज और किराये के कमरों पर होने वाले खर्च से राहत मिलने की उम्मीद थी. लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण योजना का लाभ आज तक विद्यार्थियों को नहीं मिल सका है.

भवन में उग आईं झाड़ियां

लंबे समय से बंद पड़े भवन के आसपास जंगली झाड़ियां उग आई हैं. देखरेख के अभाव में भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. वर्षों तक उपयोग में नहीं आने के कारण सरकारी संपत्ति के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते भवन का निर्माण पूरा कर उसे विद्यार्थियों के लिए शुरू किया जाता तो बड़ी संख्या में छात्र लाभान्वित होते.

निजी कमरों में रहने को मजबूर छात्र

छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं होने का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है. जरूरतमंद छात्र मजबूरी में निजी लॉज और किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. इससे उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का वर्षों तक अधूरा रहना गंभीर चिंता का विषय है.

समय पर पूरा नहीं हुई योजना तो बढ़ेगा नुकसान

स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि अधूरे भवन पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो इसकी स्थिति और खराब हो सकती है. भवन के निर्माण में खर्च की गई राशि के बावजूद इसका उपयोग नहीं होना सरकारी योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.

प्रशासन से जल्द समीक्षा की मांग

स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों ने प्रशासन से छात्रावास निर्माण की स्थिति की समीक्षा कर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में कोई तकनीकी, वित्तीय या प्रशासनिक अड़चन है तो उसे दूर कर भवन को विद्यार्थियों के उपयोग में लाया जाए। साथ ही लंबे समय से अधूरे पड़े भवन की सुरक्षा और रखरखाव की भी व्यवस्था की जाए. 17 साल से अधूरी पड़ी यह योजना अब सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गई है.

Also Read: हजारीबाग: NTPC की कोल ट्रांसपोर्टिंग 16 घंटे ठप, मुआवजे के आश्वासन के बाद हटा जाम

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *