Hazaribagh: बड़कागांव के डाड़ीकला थाना क्षेत्र के चेपाकला स्थित कोयला ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर शुक्रवार की सुबह हुए सड़क हादसे में 55 वर्षीय जयपाली महतो की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश देर रात तक जारी रहा. चेपाकला लोहा पुल के समीप सुबह करीब पांच बजे हुई घटना के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे और मृतक के आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर कोयला ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह ठप कर दी. करीब 16 घंटे तक NTPC की कोल ट्रांसपोर्टिंग बाधित रहने से कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

हाईवा की चपेट में आने से मौत का आरोप
मृतक की पहचान चेपाकला के चिचाल मझलीडाड़ी निवासी जयपाली महतो के रूप में हुई है. परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला ट्रांसपोर्टिंग में लगे हाईवा की चपेट में आने से जयपाली महतो की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए और ट्रांसपोर्टिंग मार्ग को जाम कर दिया. ग्रामीणों का कहना था कि कोयला परिवहन मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है.
13 माइल में भी सड़क जाम, बड़कागांव-हजारीबाग मार्ग रहा बंद
घटना के विरोध में ग्रामीणों ने सुबह करीब छह बजे 13 माइल के पास बड़कागांव-हजारीबाग मुख्य मार्ग को जाम कर दिया. सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया. सूचना मिलने के बाद पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर जाम हटाने का प्रयास किया. प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद दोपहर करीब 12 बजे मुख्य सड़क से जाम हटाया गया, लेकिन मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ.
शाम चार बजे फिर जाम, ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर भी डटे रहे ग्रामीण
दोपहर में जाम हटने के बाद ग्रामीणों ने शाम करीब चार बजे एक बार फिर मुख्य सड़क को जाम कर दिया. वहीं दूसरी ओर चेपाकला स्थित कोयला ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर भी ग्रामीण टेंट लगाकर सुबह से ही डटे रहे. इसके कारण एनटीपीसी की कोयला ढुलाई पूरी तरह बंद रही. ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया था, कि जब तक मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और नौकरी देने को लेकर कंपनी की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक ट्रांसपोर्टिंग शुरू नहीं होने दी जाएगी.
नौकरी और मुआवजे के साथ बाइपास सड़क की मांग
मृतक के परिजनों ने कंपनी से उचित मुआवजा देने के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की. ग्रामीणों ने कोयला कंपनियों से ग्रामीणों के आवागमन के लिए अलग बाइपास सड़क का निर्माण कराने की भी मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली सड़क से भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है. इसी मार्ग पर ग्रामीणों को भी आवागमन करना पड़ता है. ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. बाइपास सड़क बनने से ग्रामीणों और कोयला परिवहन वाहनों का रास्ता अलग हो जाएगा और हादसों पर काफी हद तक रोक लग सकती है.
सहमति नहीं बनने से देर रात तक जारी रही वार्ता
अंचलाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि कंपनी और मृतक के परिजनों के बीच मुआवजे एवं अन्य मांगों को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण जाम की स्थिति बनी हुई थी. प्रशासन की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच लगातार वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया गया और देर रात सड़क जाम हटा कोयला परिवहन शुरू कराया गया.
रात 10 बजे मुआवजे के आश्वासन पर हटा जाम
कई दौर की बातचीत के बावजूद तत्काल सहमति नहीं बन पाई और सड़क जाम जारी रहा. लगभग 16 घंटे तक चले गतिरोध के बाद रात करीब 10 बजे मुआवजे का आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने जाम हटा दिया. इसके साथ ही एनटीपीसी की कोल ट्रांसपोर्टिंग दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हुआ. हालांकि ग्रामीणों ने भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए बाइपास सड़क निर्माण समेत अन्य मांगों को लेकर कंपनी और प्रशासन से ठोस पहल की मांग की है.
हादसे के बाद फिर उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
चेपाकला की घटना ने कोयला ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज आवाजाही के बीच पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं है. ग्रामीणों ने मांग की है कि कोयला परिवहन मार्ग पर गति नियंत्रण, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और अलग ग्रामीण मार्ग की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की घटना का सामना न करना पड़े.

