Ranchi: हजारीबाग में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. मामला अवैध खनन और वन विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़ा है जिसमें अब हजारीबाग की सीजेएम कोर्ट ने पुलिस से जवाब तलब किया है.पर्यावरण कार्यकर्ता शनि कांत (मंटू सोनी) का आरोप है कि वन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन कर करीब 156 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन होने दिया.
CID जांच में भी मिली थी अनियमितता की पुष्टि
इस मामले की गंभीरता की पुष्टि सीआईडी (CID) जांच में भी हो चुकी हैइसके बावजूद हजारीबाग पुलिस ने दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया. शिकायतकर्ता मंटू सोनी के मुताबिक उन्होंने नवंबर 2025 में बड़ा बाजार ओपी प्रभारी को FIR के लिए आवेदन दिया था जिसे पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया. पुलिस ने मामले की जांच के लिए उसी वन विभाग को पत्र लिखा जिसके अधिकारी खुद आरोपी हैं.

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बिना जांच के रिपोर्ट SP को भेजने का आरोप
मुख्य आरोपी रविंद्र नाथ मिश्रा ने अपने ही अधीनस्थ अधिकारी से रिपोर्ट बनवाकर पुलिस को सौंप दी और सदर एसडीपीओ ने बिना किसी ठोस छानबीन के एक ही दिन में आरोपी द्वारा दी गई रिपोर्ट को एसपी को भेज दिया. पुलिस ने जानबूझकर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की ताकि आरोपियों को बचाया जा सके.पुलिस की इस कार्यशैली से परेशान होकर मंटू सोनी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस केस में वन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है.
