Hazaribagh : केरेडारी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बसरिया में पढ़ने वाले सैकड़ों स्कूली बच्चों की सुरक्षा गंभीर खतरे में है. कोल माइंस परियोजना से जुड़ी BGR कंपनी द्वारा की जा रही लगातार हैवी ब्लास्टिंग का असर अब सीधे विद्यालय भवन पर दिखाई देने लगा है. तेज धमाकों के कारण स्कूल की दीवारों और छत में कई जगह दरारें पड़ गई हैं. ऐसे में बच्चों और शिक्षकों के सिर पर हर समय हादसे का खतरा मंडरा रहा है.
धमाका होते ही हिलने लगता है स्कूल भवन
विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने बताया कि जैसे ही ब्लास्टिंग होती है, पूरे स्कूल भवन में कंपन महसूस होने लगता है. बेंच और दीवारें तक हिलने लगती हैं, जिससे बच्चों में दहशत फैल जाती है. कई बार बच्चे डरकर कक्षा छोड़ बाहर निकल जाते हैं. इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है. बच्चों का कहना है कि ब्लास्टिंग के समय उन्हें हमेशा डर बना रहता है कि कहीं छत या दीवार का कोई हिस्सा टूटकर उनके ऊपर न गिर जाए.
दीवारों और छत में बढ़ती दरारें बनी चिंता का कारण
लगातार हो रही ब्लास्टिंग से विद्यालय भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. दीवारों और छत में आई दरारें किसी बड़े हादसे की चेतावनी दे रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजय कुमार ने बताया कि ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान को लेकर पहले भी NTPC और BGR कंपनी को लिखित आवेदन दिया गया था. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन संबंधित एजेंसियां इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही हैं.
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अभिभावकों और ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की जान से बड़ा कोई विकास कार्य नहीं हो सकता. यदि ब्लास्टिंग के कारण स्कूल भवन को नुकसान पहुंच रहा है, तो या तो ब्लास्टिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया जाए और विद्यालय भवन को सुरक्षित बनाया जाए. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, NTPC और BGR कंपनी से तत्काल स्कूल भवन का तकनीकी निरीक्षण कराने, ब्लास्टिंग के प्रभाव की जांच कराने तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि मासूम बच्चों की जिंदगी सुरक्षित रह सके.
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