हजारीबाग : एक अधिकारी के भरोसे छह जिले, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

Hazaribagh : ग्रामीण कार्य विभाग (ग्रामीण कार्य प्रमंडल) में अधिकारियों की कमी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. विभाग...

Hazaribagh : ग्रामीण कार्य विभाग (ग्रामीण कार्य प्रमंडल) में अधिकारियों की कमी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. विभाग में एक ही अधिकारी को एक साथ छह जिलों की जिम्मेदारी सौंपे जाने से प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं. जानकारी के अनुसार, अधीक्षण अभियंता देव सहाय भगत हजारीबाग कार्य अंचल में अपनी मूल जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ अन्य जिलों के कार्यपालक अभियंता का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं. उनके कार्यक्षेत्र में हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, कोडरमा सहित कुल छह जिलों से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं.

करोड़ों की योजनाओं की निगरानी कैसे?

ग्रामीण कार्य विभाग के माध्यम से प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये की सड़क और पुल निर्माण योजनाएं संचालित होती हैं. इन योजनाओं की गुणवत्ता जांच, नियमित निरीक्षण, तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, भुगतान, कर्मचारियों के प्रशासनिक कार्य और निर्माण कार्यों की समीक्षा जैसी अहम जिम्मेदारियां अधिकारियों पर होती हैं. ऐसे में एक ही अधिकारी के पास कई जिलों का प्रभार होने से परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी, समय पर निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

युवाओं ने उठाया नियुक्ति का सवाल

सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को लेकर पहले से ही युवाओं द्वारा नियमित नियुक्ति की मांग उठाई जा रही है. उनका कहना है कि यदि विभाग में अधिकारियों की कमी है तो अतिरिक्त प्रभार देने के बजाय रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सके.

विभाग का पक्ष

इस संबंध में अधीक्षण अभियंता देव सहाय भगत का कहना है कि सरकार जहां जिस पद पर दायित्व देती है, वहां पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपे गए हैं, उनका पूरी क्षमता और ईमानदारी से निर्वहन किया जा रहा है.

व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

लोगो का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए नियमित फील्ड विजिट और तकनीकी निगरानी आवश्यक होती है. ऐसे में यदि एक अधिकारी के जिम्मे कई जिलों का कार्यभार हो, तो योजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अब सवाल यह है कि जब सरकार रिक्त पदों को भरने की बात करती है, तो वर्षों से खाली पड़े तकनीकी पदों पर नियमित नियुक्तियां कब होंगी और अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था कब तक जारी रहेगी.

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