HAZARIBAGH: जिले में दंदाहा नदी से तीन शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैली हुई है. इस घटना ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. मृतका खुशी के भाई शाहिद अंसारी ने हजारीबाग पुलिस और कुछ बिचौलियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है. शाहिद अंसारी का दावा है कि जब बच्चे लापता हुए थे, तब उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई थी. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने लापता बच्चों की तलाश करने के नाम पर पीड़ित परिवार से 4,500 रुपये लिए. पैसे लेने के बावजूद, परिवार को सही जानकारी देने के बजाय गुमराह किया गया. शाहिद के अनुसार, पुलिस ने उन्हें यह आश्वासन दिया था कि बच्चे सुरक्षित हैं और वे अजमेर शरीफ पहुंच गए हैं. जल्द ही उन्हें वापस लाया जाएगा.
इस झूठे आश्वासन के कारण परिवार कुछ समय के लिए शांत हो गया, लेकिन अंत में बच्चों के शव नदी से बरामद हुए, जिसने पुलिस के दावों की पोल खोल दी.
यूट्यूबर और दलाल की भूमिका संदिग्ध:
परिजनों ने केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि एक कथित यूट्यूबर और दलाल पर भी प्रताड़ना का आरोप लगाया है. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने बच्चों को खोज निकालने के बदले परिवार से 50 हजार रुपये राशि की मांग की थी. आर्थिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से टूट चुके परिवार के लिए यह दोहरी मार थी. मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू शवों की बरामदगी का स्थान है. शाहिद अंसारी ने मीडिया को बताया कि, जिस स्थान (दंदाहा नदी) से शव बरामद हुए हैं, वहां ग्रामीणों ने पहले भी कई बार खोजबीन की थी. उस समय वहां कोई सुराग नहीं मिला था. अचानक उसी स्थान से तीन शवों का मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि शवों को बाद में वहां फेंका गया होगा या मामले में कुछ छिपाया जा रहा है.
एसपी ने दिए जांच के आदेश:
मामले के तूल पकड़ने और पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद एसपी अमन कुमार ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय टीम का गठन किया है.
