Hazaribagh: बागों के शहर के रूप में विख्यात हजारीबाग जिला मुख्यालय स्थित लगभग 146 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पंच मंदिर परिसर में एक बार फिर जबरन कब्जा, ताला तोड़ने और पूजा-पाठ में व्यवधान उत्पन्न करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है. बीते 16 जून की दोपहर करीब 3 बजे दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा माननीय न्यायालय के यथास्थिति आदेश की अवहेलना करते हुए पूरे मंदिर परिसर के मुख्य द्वारों और गर्भगृहों में अपना ताला जड़ दिया गया, जिससे भगवान एक बार फिर मंदिर के भीतर ‘कैद’ हो गए. इस घटना से स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों और न्यास समिति के सदस्यों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
घटना के तुरंत बाद आक्रोशित पक्ष और मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम मिश्रा ने सदर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद हरकत में आई सदर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदिर परिसर का दौरा किया और आंशिक रूप से कुछ मुख्य जगहों के ताले खुलवाए. हालांकि, पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी पक्ष द्वारा अभी भी मंदिर के सात से आठ गेटों पर अवैध रूप से ताला लगा रखा गया है, जिससे नियमित धार्मिक गतिविधियों में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है. इस मामले को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विजय केसरी और सुरेंद्र वर्मा ने मीडिया के समक्ष आकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.
1901 का ऐतिहासिक दानपत्र
इस विवाद की जड़ें मंदिर की स्थापना और उसकी विशाल संपत्ति से जुड़ी हैं. स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, सन 1880 में मुख्य संस्थापिका स्वर्गीय मैदा कुंवरी ने सार्वजनिक सहयोग और अपना समस्त संचित धन लगाकर इस भव्य पंच मंदिर का निर्माण करवाया था. मैदा कुंवरी ने सन 1901 में राधा-कृष्ण भगवान के नाम से एक रजिस्टर्ड डीड (दानपत्र) निष्पादित कर मंदिर और उससे संबद्ध समस्त संपत्ति को भगवान को समर्पित कर दिया था, ताकि हजारीबाग के तमाम हिंदुओं के लिए पूजा-पाठ सर्वसुलभ हो सके.
करोड़ों की संपत्ति पर नजर
मंदिर के नाम पर हजारीबाग शहर में दुकानें हैं. इसके अलावा हेंदेगीर और बड़कागांव में सैकड़ों एकड़ की बेशकीमती भूमि उपलब्ध है, जिसे हथियाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रचे जाने का आरोप लगाया जा रहा है.
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पारिवारिक संपत्ति बनाम देवोत्तर संपत्ति का विवाद
पुजारी घनश्याम मिश्रा, जो पिछले 27 वर्षों से अपने परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में मंदिर की सेवा कर रहे हैं, उन्होंने थाने को दिए आवेदन में बताया कि हजारीबाग का यह ऐतिहासिक पंच मंदिर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन संचालित होता आ रहा है. बिहार और झारखंड के विभाजन के उपरांत इसे झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड की देखरेख में संचालित किया जा रहा है.
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कुछ स्थानीय व्यक्ति, जिनमें प्रदीप साव, सुभाष साव, राजेश साव, डॉ. विनोद, सुनील साव, विमल साव, आशीष साव और स्नेहल साव आदि शामिल हैं, स्वयं को निःसंतान मैदा कुंवरी का तथाकथित वंशज बताते हुए इसे अपनी “पारिवारिक संपत्ति” घोषित करने का प्रयास कर रहे हैं. स्थानीय न्यास समिति का सवाल है कि जब 1901 के दानपत्र में स्पष्ट रूप से संपत्ति सार्वजनिक और धार्मिक कार्यों हेतु समर्पित कर दी गई थी, तो यह किसी की निजी या पारिवारिक संपत्ति कैसे हो सकती है?
2011 की घटना की पुनरावृत्ति और हाईकोर्ट का आदेश
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, वर्ष 2011 में भी इसी प्रकार मुख्य द्वार और राधा-कृष्ण के मुख्य मंदिर सहित चारों गुंबदों पर ताला जड़ दिया गया था. उस समय पंच मंदिर बचाओ समिति और मोहल्ले वालों के भारी विरोध तथा जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ताला खुलवाया गया था. इसके बाद यह मामला झारखंड उच्च न्यायालय चला गया, जहां केस संख्या W.P.(C) 3244/25 के तहत यह मामला वर्तमान में भी लंबित है.
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को अंतिम फैसला आने तक कड़ाई से यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया था. इसके बावजूद दूसरे पक्ष द्वारा न्यास समिति के सदस्यों की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर मंदिर परिसर के पूर्व के तालों को काटकर अपने ताले लगा दिए गए.
पुजारियों से चाबियां छीनीं
थाने में दर्ज आवेदन के अनुसार, आरोपियों ने मंदिर परिसर में जबरन प्रवेश कर वहां मौजूद पुजारियों को डराया-धमकाया और उनसे मंदिर की चाबियां भी छीन लीं. यह कृत्य न केवल आपराधिक अतिक्रमण और संपत्ति को क्षति पहुंचाने की श्रेणी में आता है, बल्कि इससे संपूर्ण हजारीबाग के श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंची है.
प्रशासन से सुरक्षा की मांग
सदर थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है. आवेदन की प्रतियां उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, पदेन अध्यक्ष सह सदर एसडीओ और सचिव (झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड) को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई हैं. स्थानीय जनता और न्यास बोर्ड ने मांग की है कि भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत नामजद अभियुक्तों पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए और मंदिर परिसर में स्थायी पुलिस सुरक्षा बल तैनात किया जाए.



