Ranchi: हाल में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव में रांची नगर निगम से गलत हलफनामा दायर कर चुनाव जीतने वाले पार्षदों पर गाज गिर सकती है. मामले में झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश आनंदा सेन की अदालत ने प्रार्थी नाजिमा राजा की रिट पिटीशन (WP 3200/2026) पर सुनवाई करते हुए मामले में राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार, उपायुक्त रांची, SDO रांची एवं सभी नवनिर्वाचित 53 वार्ड के पार्षदों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है.
फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी का आरोप
प्रार्थी ने यह आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान जीतने वाले प्रत्याशियों ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी है. वहीं कई दस्तावेज, जो प्रस्तुत किए गए हैं, वे फर्जी हैं. प्रार्थी ने कहा है कि इस बाबत चुनाव के दौरान ही मामले की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग, उपायुक्त और SDO को दी गई, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

जांच और सत्यापन की मांग
प्रार्थी ने अदालत से यह आग्रह किया है कि चुनाव जीतने वाले पार्षदों के हलफनामे की जांच हो. वहीं प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का भी सत्यापन कराया जाए. फिलहाल अदालत ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यदि जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं या हलफनामे में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो ऐसे जीतने वाले प्रत्याशियों का निर्वाचन रद्द भी हो सकता है.
BMC चुनाव का दिया गया उदाहरण
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में हुए चुनाव में नवनिर्वाचित लगभग 21 प्रत्याशियों का नामांकन एवं वार्ड काउंसलरों का निर्वाचन रद्द कर दिया गया था. दरअसल, जीतने वाले कई काउंसलरों ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी थी. वहीं फर्जी जाति प्रमाण पत्र के अलावा दो से अधिक बच्चों के होने की जानकारी भी छिपाई थी. इस पर RTI एक्टिविस्ट की दी गई जानकारी के आधार पर निर्वाचित पार्षदों का निर्वाचन रद्द हुआ था. इसमें प्रमुख AIMIM की शहर सेख भी शामिल थीं, जो अपने बयान की वजह से विवादों में आई थीं.
क्या कहता है नियम?
फर्जी हलफनामा देने का दोषी पाए जाने पर Representation of People Act (RPA), 1951 की धारा 125A के तहत उस प्रत्याशी का निर्वाचन रद्द किया जा सकता है. वहीं अधिकतम 6 महीने की जेल हो सकती है. इसके अलावा जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान है.
