Jamtara : जिले से स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा करने वाली एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. समय पर सरकारी ‘108 एंबुलेंस’ न मिलने के कारण एक बेबस परिवार को अपने मरीज को ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा. बदकिस्मती से, सही समय पर इलाज न मिलने के कारण मरीज ने दम तोड़ दिया. अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया है. शनिवार को जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी खुद स्थिति को संभालने और सरकार का पक्ष रखने जामताड़ा पहुंचे, तो उन्हें भारी फजीहत का सामना करना पड़ा. मीडिया के कैमरों के सामने ही मृतक के बेटे ने स्वास्थ्य मंत्री के दावों की धज्जियां उड़ा दीं.
स्वास्थ्य मंत्री के सामने ही फूट-फूट कर रोया मृतक का बेटा, खोली पोल
शनिवार को जामताड़ा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जब मीडिया के सामने इस पूरी दर्दनाक घटना को महज एक सामान्य दुर्घटना करार देने की कोशिश कर रहे थे, ठीक उसी वक्त वहां एक ऐसा मोड़ आया जिसने अधिकारियों के हाथ-पैर फुला दिए. मौके पर मौजूद मृतक के बेटे बिमल टुडू ने हिम्मत दिखाई और सीधे स्वास्थ्य मंत्री के सामने आकर कैमरे के सामने रोते हुए अपनी आपबीती सुना दी. बिमल ने रोते हुए बताया मेरे पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद हम लगातार सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा के नंबर पर कॉल करते रहे. हमने कई बार गुहार लगाई, लेकिन कंट्रोल रूम या स्थानीय स्तर से हमें कोई मदद नहीं मिली. जब पिता की हालत बेहद नाजुक होने लगी और कोई रास्ता नहीं बचा, तो हम लाचार परिजनों को मजबूरी में ट्रैक्टर मंगाना पड़ा. बिमल के इस सीधे और तीखे आरोपों के बाद भरी महफिल और मीडिया के कैमरों के सामने स्वास्थ्य मंत्री और उनके साथ आए विभागीय अधिकारियों के लिए बेहद असहज स्थिति उत्पन्न हो गई. अधिकारी बगलें झांकते नजर आए.
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क्या है पूरा मामला
घटना 12 जून की रात की है. जामताड़ा के एक सुदूर गांव के रहने वाले मोनू टुडू की अचानक तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई. मरीज की हालत गंभीर होती देख परेशान परिजनों ने तुरंत सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम से संपर्क साधा. परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने समय रहते कई बार कॉल किया और मरीज की नाजुक स्थिति का हवाला देते हुए मदद की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची.
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई सरकारी सहायता नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने खुद ही कदम उठाने का फैसला किया. गांव में कोई अन्य उपयुक्त वाहन न होने के कारण मजबूरी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था की गई. उस ट्रैक्टर-ट्रॉली पर एक लकड़ी की खटिया रखी गई, जिस पर गंभीर रूप से बीमार मोनू टुडू को लिटाया गया और किसी तरह ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए जामताड़ा सदर अस्पताल लाया गया. हालांकि, तब तक काफी कीमती समय बर्बाद हो चुका था. अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद, उपचार के दौरान मोनू टुडू की मौत हो गई.



