Garhwa: जिले के भवनाथपुर वन क्षेत्र कार्यालय से मानवता को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां राहगीरों को पानी पिलाना पुण्य का काम माना जाता है, वहीं भवनाथपुर में वनकर्मियों ने पेयजल संकट दूर करने के लिए बोरिंग करा रहे एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को न सिर्फ बंधक बनाया, बल्कि रातभर बिना भोजन और पानी के हाजत में तड़पने के लिए छोड़ दिया. पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि अगले दिन एक बिचौलिए के माध्यम से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेने के बाद ही वन विभाग ने उन्हें रिहा किया.
पानी के लिए हो रही थी बोरिंग, वनकर्मियों ने बुजुर्ग को दबोचा
जानकारी के अनुसार, भवनाथपुर उत्तरी वन क्षेत्र के कुपा वन क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे पिछले दो वर्षों से एक दर्जन से अधिक अत्यंत गरीब परिवार झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं. इन दिनों यह पूरा इलाका भीषण पेयजल संकट की चपेट में है. बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे इन गरीब परिवारों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर पानी की किल्लत दूर करने के उद्देश्य से एक बोरिंग कराने की योजना बनाई थी. शुक्रवार को जैसे ही बोरिंग का काम शुरू हुआ, स्थानीय वनकर्मियों को वन भूमि पर काम होने की भनक लग गई. वनकर्मी फौरन दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और काम को रुकवा दिया. इस दौरान वहां मौजूद 75 वर्षीय बुजुर्ग कबिलास सिंह को वनकर्मियों ने जबरन पकड़ लिया और गाड़ी में बैठाकर वन क्षेत्र कार्यालय ले आए.
क्रूरता की हदें पार: पानी मांगने पर थमा दी डीजल मिली बोतल
पीड़ित बुजुर्ग कबिलास सिंह ने वनपाल सुनील राय सहित अन्य वनकर्मियों पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया, कि “शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वन विभाग के लोग मुझे पकड़कर कार्यालय ले आए थे. मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया था. देर रात जब मुझे तेज भूख और प्यास लगी, तो मैंने वहां ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से हाथ जोड़कर खाना और पानी मांगा. लेकिन वनकर्मियों का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने खाना देने से साफ मना कर दिया और जब मैंने पानी के लिए दोबारा गुहार लगाई, तो क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उन्होंने मुझे डीजल मिली हुई पानी की एक बोतल थमा दी.” बुजुर्ग पूरी रात बिना अन्न-जल के हाजत में तड़पते रहे.
छोड़ने के एवज में वनकर्मियों ने की पैसों की मांग
अगले दिन शनिवार सुबह करीब आठ बजे असना बांध निवासी अशोक यादव नामक व्यक्ति को जब इसकी भनक लगी, तब उन्होंने किसी तरह वन कार्यालय पहुंचकर बुजुर्ग के लिए भोजन और शुद्ध पानी का प्रबंध किया. इस पूरे मामले में वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. पीड़ित बुजुर्ग कबिलास सिंह का आरोप है कि उन्हें छोड़ने के एवज में वनकर्मियों द्वारा रुपयों की मांग की जा रही थी. अंततः शनिवार को एक स्थानीय बिचौलिए के माध्यम से वनकर्मियों को 10 हजार रुपये की घूस दी गई, जिसके बाद ही 12 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखे गए बुजुर्ग को वन विभाग की कस्टडी से छोड़ा गया.
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