Seraikela: टाटा-रांची हाइवे NH-33 पर रात के अंधेरे में फाइनेंस कंपनी के नाम पर गाड़ियों की अवैध धर-पकड़ और वसूली का खेल सामने आया है. आरोप है कि अनधिकृत टीमें कागजी प्रक्रिया का हवाला देकर वाहन चालकों से मोटी रकम वसूल रही हैं. बिना वर्दी, आई-कार्ड या किसी अधिकृत अनुमति के यह कार्रवाई खुलेआम की जा रही है.
रात 10 बजे के बाद सक्रिय गिरोह, चालकों से जबरन वसूली
चालकों के अनुसार चांडिल से सरायकेला के बीच रात 10 बजे के बाद कई स्थानों पर तथाकथित रिकवरी एजेंट सक्रिय हो जाते हैं. ये लोग अचानक वाहनों को रोकते हैं और फाइनेंस डिफॉल्ट का हवाला देकर गाड़ी जब्त करने की धमकी देते हैं.
कागजात दिखाने के बावजूद ‘सेटलमेंट’ के नाम पर नकद रकम की मांग की जाती है. विरोध करने पर बदसलूकी और मारपीट की नौबत तक आ जाती है, जिससे चालक दहशत में हैं.
पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल, उठ रहे गंभीर प्रश्न
स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यह अवैध वसूली लंबे समय से जारी है, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. इस पूरे मामले में कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं:
- रिकवरी एजेंटों को रात में हाईवे पर कार्रवाई का अधिकार किसने दिया?
- अगर अधिकृत हैं तो पुलिस को साथ क्यों नहीं रखते?
- वसूली की रकम की रसीद क्यों नहीं दी जाती?
- जिला प्रशासन और पुलिस को जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
थाना प्रभारियों का अलग-अलग रुख
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के थाना प्रभारियों के बयान भी अलग-अलग सामने आए हैं. कुछ ने बताया कि उनके क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों को चेतावनी देकर बंद कराया गया है, जबकि अन्य ने कहा कि उनके इलाके में ऐसी कोई जानकारी नहीं है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पुलिस की मौजूदगी के कोई भी निजी एजेंसी हाईवे पर वाहन नहीं रोक सकती. शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी.
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प्रशासन की अपील, अवैध वसूली की तुरंत दें सूचना
पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति रात में गाड़ी रोकता है तो तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाना को सूचना दें. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फाइनेंस रिकवरी के लिए भी विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और रात में हाईवे पर इस तरह की धर-पकड़ पूरी तरह अवैध है.
