Bihar: पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने iPhone की खराबी दूर नहीं करने और सर्विस सेंटर में जमा मोबाइल ग्राहक को वापस नहीं लौटाने के मामले में Apple India और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराया है. आयोग ने कंपनी को ग्राहक को उसी मॉडल का नया iPhone देने या फिर ब्याज सहित पूरी खरीद राशि लौटाने का आदेश दिया है. साथ ही मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे का खर्च भी अदा करने को कहा गया है.
44,300 रुपये में खरीदा था iPhone, कुछ ही दिनों में आने लगी खराबी
यह मामला गया जिले के निवासी करण कुमार से जुड़ा है. उन्होंने बाबा कंप्यूटर्स के माध्यम से 44,300 रुपये में iPhone खरीदा था. खरीद के कुछ समय बाद ही फोन बार-बार हैंग होने लगा और ठीक से काम करना बंद कर दिया. समस्या दूर कराने के लिए उन्होंने 13 जुलाई 2015 और 1 अगस्त 2015 को पटना स्थित Apple के अधिकृत सर्विस सेंटर में मोबाइल जमा कराया, लेकिन लंबे समय तक न तो फोन की मरम्मत की गई और न ही उसे वापस किया गया. इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.
कंपनी फोन लौटाने का दावा साबित नहीं कर सकी
सुनवाई के दौरान Apple India और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर ने आयोग के समक्ष दावा किया कि मरम्मत के बाद मोबाइल ग्राहक को वापस सौंप दिया गया था. हालांकि कंपनी इस दावे के समर्थन में कोई रसीद, डिलीवरी रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज पेश नहीं कर सकी. रिकॉर्ड की जांच में आयोग ने पाया कि सर्विस सेंटर के कर्मचारी के हस्तलिखित नोट के अनुसार संबंधित iPhone अब भी सर्विस सेंटर में ही रखा हुआ था. इसके आधार पर आयोग ने कंपनी की दलील को अस्वीकार कर दिया.
नया iPhone दें, नहीं तो ब्याज सहित लौटाएं पूरी रकम
आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने आदेश दिया कि कंपनी ग्राहक को उसी मॉडल का नया iPhone उपलब्ध कराए. यदि ऐसा संभव नहीं हो तो 44,300 रुपये की मूल राशि 13 अगस्त 2015 से 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए. आयोग के अनुसार ब्याज सहित यह राशि लगभग 1.46 लाख रुपये तक पहुंचती है.
मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे का खर्च भी देना होगा
आयोग ने Apple India और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना के लिए 15,000 रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया है. साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 120 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो कंपनी के खिलाफ नियमानुसार अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
