Jamtara : जिला में लगातार हो रही झमाझम बारिश ने खेती को नई रफ्तार दे दी है. पर्याप्त बारिश होने से खेतों में पानी भर गया है और धान की रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में खेतों का नजारा पूरी तरह बदल गया है. कहीं किसान खेत तैयार करने में जुटे है तो कहीं महिलाएं और पुरुष मिलकर धान की रोपाई कर रहे है. बारिश के बाद किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ दिखाई दे रही है. पिछले दो दिनों में जिले में लगभग 7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है. जिससे खरीफ खेती को बड़ी राहत मिली है. नारायणपुर प्रखंड के पबिया गांव में किसान वासुदेव मंडल के खेत में बड़ी संख्या में किसान धान रोपाई में जुटे रहे.
खेतों में पर्याप्त नमी
इसी प्रकार करमाटांड़ प्रखंड के कालाझारिया, जियालजोरी सहित आसपास के कई गांवों में भी धान रोपाई ने गति पकड़ ली है. किसान परिवार सुबह से खेतों में पहुंचकर रोपाई कार्य में जुटे है. कई स्थानों पर मजदूरों के साथ परिवार के सदस्य भी खेती के कार्य में हाथ बंटा रहे है. अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध होने से रोपनी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई है. किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे थे. समय पर हुई वर्षा से धान की खेती को संजीवनी मिली है और इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है. उनका मानना है कि अगर आने वाले दिनों में भी नियमित बारिश होती रही, तो उत्पादन और बेहतर होने की संभावना है.
धान की अच्छी उपज के लिए संतुलित रोपाई और पोषण जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की अधिक उपज के लिए 20 से 25 दिन की स्वस्थ पौध की रोपाई करनी चाहिए. रोपाई के समय दो से तीन पौधे एक साथ लगाएं और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 20×15 सेंटीमीटर रखें, ताकि फसल को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिल सके. खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी बनाए रखे और आवश्यकता के अनुसार यूरिया, डीएपी और पोटाश का संतुलित उपयोग करें. समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण और कीट-रोग की निगरानी भी आवश्यक है. वैज्ञानिक पद्धति से रोपाई करने पर धान की उपज और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती है.
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