Jamtara: जामताड़ा सदर प्रखंड के अमलाचातर गांव में निर्माणाधीन नाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में कथित तौर पर मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर अब तक योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है, जिससे कार्य की लागत, विभाग, संवेदक और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही है.

करीब आधा किलोमीटर लंबी नाली का कराया जा रहा निर्माण
मिली जानकारी के अनुसार, उक्त निर्माण कार्य पथ निर्माण विभाग (PWD) के तहत कराया जा रहा है. परियोजना के तहत मिहिजाम के शहीद निर्मल महतो चौक से अमलाचातर, गोपालपुर होते हुए कोलाडाबर तक सड़क एवं नाली निर्माण का कार्य प्रस्तावित है. इसी योजना के तहत अमलाचातर गांव में करीब आधा किलोमीटर लंबी नाली का निर्माण कराया जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. उनका कहना है कि कार्यस्थल पर विभागीय अभियंता की नियमित निगरानी नहीं दिखती और संवेदक की ओर से भी पर्याप्त देखरेख नहीं की जा रही है. ग्रामीणों के अनुसार, कार्यस्थल पर मौजूद मुंशी से जब विभाग और संवेदक से संबंधित जानकारी मांगी गई, तो वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके और खुद को मजदूर बताते हुए वहां से चले गए.

निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने नाली निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि नाली निर्माण में सीमेंट की मात्रा पर्याप्त नहीं रखी जा रही है. इसके अलावा, नाली निर्माण से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत ईंट की सोलिंग किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन निर्माण स्थल पर सोलिंग नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर सीधे मिट्टी के ऊपर ही ढलाई की जा रही है. उनका यह भी आरोप है कि जहां बेस की मोटाई करीब चार इंच होनी चाहिए, वहां कथित तौर पर एक से दो इंच की परत में ही ढलाई की जा रही है.

आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक, इससे पहले सड़क के दूसरे हिस्से में भी नाली का निर्माण कराया गया था, लेकिन बारिश के बाद उसकी स्थिति पर सवाल खड़े हो गए. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान नाली के नीचे की मिट्टी बह जाने से कुछ हिस्सों में खाली जगह बन गई और नाली के धंसने का खतरा उत्पन्न हो गया. इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध करते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया था. ग्रामीणों के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे और जांच का आश्वासन दिया गया था. हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. वर्तमान में भी नाली के नीचे मिट्टी खिसकने की आशंका के कारण इसके भविष्य में क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है.
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग
ग्रामीणों ने विभाग और प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, मानकों के विपरीत पाए जाने वाले निर्माण को हटाकर गुणवत्तापूर्ण तरीके से दोबारा काम कराने तथा यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ऐसे में अब यह देखना होगा, कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद पथ निर्माण विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कब तक पूरी होती है.

