Ranchi: झारखंड की सियासत में विकास बनाम किसान के अधिकार की लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है. पूर्व विधायक सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर नगड़ी में रिम्स-2 अस्पताल के लिए हो रहे कृषि भूमि अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया है. सीता सोरेन ने दो टूक कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, लेकिन हजारों आदिवासी और मूलवासी किसानों के अस्तित्व को दांव पर लगाकर ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस अधिग्रहण को तत्काल रद्द करने की मांग की है.

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उपजाऊ जमीन और किसानों के अस्तित्व का संकट
सीता सोरेन ने पत्र में नगड़ी के किसानों की पीड़ा को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि सरकार जिस जमीन पर अस्पताल बनाने का प्रस्ताव ला रही है, वह बेहद उपजाऊ कृषि भूमि है. नगड़ी के स्थानीय किसान पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं. यह जमीन उनकी आय और जीवनयापन का एकमात्र जरिया है. क्षेत्र के किसान पूर्व में भी विभिन्न सरकारी व विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीनें दे चुके हैं, जिससे कई परिवार पहले ही भूमिहीनता का दंश झेल रहे हैं. दोबारा इस उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण हुआ, तो क्षेत्र के अन्नदाताओं का अस्तित्व ही पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.

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सीता सोरेन की मांग
• नगड़ी मौजा में रिम्स-2 के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए.
• अस्पताल निर्माण के लिए रांची शहर या उसके आसपास उपलब्ध बंजर अथवा गैर-कृषि योग्य सरकारी भूमि का चयन किया जाए.
