Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची जिले के सिकिदिरी थाना क्षेत्र के दतमा गांव स्थित 10 डिसमिल भूमि से जुड़े विवाद में दायर सेकेंड अपील संख्या 136/2026 को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि मामले में कोई ऐसा महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न (Substantial Question of Law) नहीं बनता, जिसके आधार पर दूसरी अपील स्वीकार की जा सके. मामला मो. सलीम खान और राम किशुन महतो एवं पंचमी देवी के बीच भूमि स्वामित्व विवाद से जुड़ा था. वादी सलीम खान ने दावा किया था कि विवादित जमीन उनके पूर्वजों द्वारा वर्ष 1945 में खरीदी गई थी और उस पर उनका वैध अधिकार है. उन्होंने अदालत से बिक्री विलेख को वैध घोषित करने और कब्जा बहाल कराने की मांग की थी. ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2023 में वादी के पक्ष में एकतरफा (एक्स-पार्टी) फैसला सुनाया था.
मामूली त्रुटि के आधार पर डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता: अदालत
इसके खिलाफ दायर सिविल अपील को भी वर्ष 2026 में खारिज कर दिया गया था. इसके बाद प्रतिवादियों ने हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की. हाईकोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों को मुकदमे की समुचित सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए. इसलिए एक्स-पार्टी कार्यवाही को अवैध नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि केवल नोटिस की प्रक्रिया में मामूली त्रुटि के आधार पर डिक्री (Civil Cases) को रद्द नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब पक्षकार को मुकदमे की जानकारी थी.
अदालत ने यह भी माना कि वादी का दावा खाता संख्या 56, प्लॉट संख्या 64 की 10 डिसमिल भूमि से संबंधित था, जबकि अपीलकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज प्लॉट संख्या 94 की 20 डिसमिल भूमि से जुड़े थे. इसलिए दोनों दावों का आधार अलग-अलग भूमि पर था और अपीलकर्ताओं का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता. इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि निचली दोनों अदालतों के निष्कर्ष सही हैं और उनमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है. परिणामस्वरूप दूसरी अपील को खारिज कर दिया गया.



