बलात्कार पीड़ितों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : दो उंगली परीक्षण पर रोक, वहीं पीड़ितों के बच्चों की मुफ्त शिक्षा अनिवार्य

Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने बलात्कार पीड़ितों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. दरअसल झारखंड हाईकोर्ट...

Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने बलात्कार पीड़ितों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. दरअसल झारखंड हाईकोर्ट में सुषमा बड़ाइक केस के दौरान मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था, वही पीड़ितों के हालातो को देखते हुए उसके बेहतर जीवन पर लंबी सुनवाई की थी.

ऐतिहासिक फैसला सुनाया 

अदालत ने मामले पर सुनवाई कर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जिसके बाद पीड़ितों के जिंदगी में बड़े बदलाव होंगे. झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने बलात्कार पीड़ित के बच्चे को 12वीं तक मुक्त शिक्षा अनिवार्य करते हुए इसे सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारियों के नियुक्ति के आदेश दिए हैं. अदालत ने कहा कि बलात्कार की घटनाओं में पैदा हुए बच्चों के लिए 12वीं कक्षा तक मुक्त शिक्षा अनिवार्य होगा और यदि वह पढ़ाई में पीछे जाते हैं तो छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त रहेंगे.

पीड़ित को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है 

अदालत ने कहा कि बलात्कार पीड़ितों के लिए कानूनी और सामाजिक परिदृश्य को बेहतर बनाने और समाज को पीड़ित को दोषी ठहरने वाले रवैया को धीरे-धीरे बदलने की जरूरत है और उम्मीद जगाने की उद्देश्य से यह ऐतिहासिक फैसला हमने सुनाया है, अदालत ने कहां की कुछ परिस्थितियों में बलात्कार पीड़ितों को सामाजिक उपहास का पात्र बनाया जाता है. मानव वह ही आरोपी हो कुछ मामलों में पीड़ितों को समाज से बहिष्कृत भी क्या दिया जाता है. जिससे पीड़ित को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है अदालत ने अपने आदेश में इस बात को जोर दिया कि याचिकाकर्ता के द्वारा “दो उंगली परीक्षण” पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था. अदालत में इसे स्वीकार करते हुए झारखंड सरकार को एक परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है ताकि ऐसे परीक्षण रोका जा सके. अदालत ने कहा कि 2014 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यौन हिंसा के पीड़ितों के लिए चिकित्सा कानूनी देखभाल संबंधित दिशा निर्देश एवं प्रोटोकॉल शीर्षक से जुड़े एक दस्तावेज जारी किया है.

दो उंगली परीक्षण पर रोक 

उसमें कई दिशा निर्देश है दिशा निर्देशों में दो उंगली परीक्षण के बारे में स्पष्ट रूप से कहा गया है ” योनि परीक्षण जिसे आमतौर पर लोगों के द्वारा दो उंगली परीक्षण कहा जाता है. बलात्कार हिंसा को साबित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. वहीं अदालत में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को यह दिशा निर्देश दिया कि बलात्कार पीड़ितों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए. इस प्रकार के मामले को निपटने वाले पुलिस कर्मियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. उनके उचित प्रशिक्षण के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस मामले की संवेदनशीलता को समझें और जांच उपरांत विवेक का इस्तेमाल कर पीड़िता का विश्वास जीते और फिर जांच के लिए आगे बढ़े.

अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कई दिशा निर्देश जारी किए हैं जो निम्नलिखित है

लड़कियों/महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए शारीरिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है

* “समग्र शिक्षा योजना” के अंतर्गत “रानी लक्ष्मी बाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण (रक्षा)” के तहत “भारत के प्रमुख एकीकृत स्कूली शिक्षा कार्यक्रम” में आत्मरक्षा प्रशिक्षण घटक का प्रावधान है.

* उक्त योजना के अंतर्गत, सरकारी विद्यालयों/कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में कक्षा VI से XII तक की छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है ताकि उनकी सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

* उक्त कक्षाओं की छात्राओं को तीन महीने का आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, और इसके लिए धनराशि आवंटित की जाती है, जिसे प्रति विद्यालय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है.

* लड़कियों को रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे कि चाबी का गुच्छा, दुपट्टा, शॉल, मफलर, बैग, पेन/पेंसिल, नोटबुक आदि का उपयोग आत्मरक्षा के लिए हथियार के रूप में करने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

W.P.PIL-2253-of-2024.pdf

बलात्कार से जन्मे बच्चों का पुनर्वास और शिक्षा

* भारत के संविधान के अनुच्छेद 21ए के अनुसार, राज्य को छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करनी होगी, जैसा कि राज्य कानून द्वारा निर्धारित करे.

* बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है, साथ ही इससे कम आयु के बच्चों को भी संरक्षण प्रदान करता है.

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