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EXCLUSIVE : झारखंड पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट सख्त : फटकार के बाद कहीं मिले नरकंकाल, तो कहीं 8 साल बाद फिर से शुरू हुई जांच

SAURAV SINGH Ranchi : झारखंड में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया जांच के तरीकों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट इन दिनों बेहद सख्त नजर आ...

SAURAV SINGH

Ranchi : झारखंड में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया जांच के तरीकों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट इन दिनों बेहद सख्त नजर आ रहा है. पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई गंभीर मामले सामने आए है. जिनमें पुलिस की सुस्ती और संवेदनहीनता पर अदालत ने न केवल सवाल उठाए, बल्कि राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को तलब कर फटकार भी लगाई. छात्र को अवैध हिरासत में रखने से लेकर लापता लड़कियों के मामलों में लापरवाही जैसे अनेक मामले है. ऐसे में हाईकोर्ट की सख्ती ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है.

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हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से बोकारो में लापता लड़की का कंकाल मिला, 28 पुलिसकर्मी निलंबित
बोकारो में 21 जुलाई 2025 से लापता एक 18 वर्षीय युवती के मामले में पुलिस की भारी लापरवाही उजागर हुई. परिजनों का आरोप था कि शिकायत के बावजूद 10 दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई. हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के आचरण को अवमाननापूर्ण बताया. कोर्ट की फटकार के महज दो दिन के भीतर लापता लड़की का कंकाल बरामद हुआ. इस मामले में संलिप्तता और लापरवाही के आरोप में एसपी के द्वारा 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. डीजीपी और बोकारो एसपी को इस मामले में कई बार व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ा था.

चतरा में छात्र की अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
चतरा जिले में एक छात्र को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में रखने के मामले ने तूल पकड़ा. अख्तरी खातून की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पुलिसिया दादागिरी पर सख्त रुख अपनाया. 26 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चतरा के डीएसपी और दो थाना प्रभारियों को तलब किया. अदालत के आदेश पर इन अधिकारियों के मोबाइल तक जब्त कर लिए गए. एसपी ने कोर्ट को सूचित किया कि टंडवा थाना प्रभारी अनिल उरांव और जांच अधिकारी अमित कुमार को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है.

हजारीबाग में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या पर स्वतः संज्ञान
विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में एक मासूम की जघन्य हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया था. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि 24 मार्च की घटना के पांच दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी और फॉरेंसिक नमूने जांच के लिए नहीं भेजे गए थे. कोर्ट के दबाव के बाद पुलिस ने तेजी दिखाई और बच्ची की मां सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया.

गुमला में 8 साल पुराने केस की री ओपन जांच
गुमला में आठ साल पहले लापता हुई एक किशोरी के मामले में पुलिस की फाइलें धूल फांक रही थीं, लेकिन हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद जांच फिर से शुरू हुई. अदालत ने दो टूक कहा कि यदि दो सप्ताह में ठोस प्रगति नहीं हुई, तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा. कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की डीजीपी खुद गुमला पहुंचीं और एसआईटी का गठन किया. अब दिल्ली से लेकर स्थानीय स्तर तक संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है.

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