Ranchi : राज्य सरकार ने राज्य के सुदूरवर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुलभ और सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है. स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सांप-कुत्ते काटने की दवाओं से लेकर मौसमी बीमारियों की जीवन रक्षक दवाएं हर समय स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध रहनी चाहिए. इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उप-केंद्रों के लिए कुल 18,20,00,500 की राशि जारी की गयी है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन और चिकित्सा सुविधाओं के लिए 13,04,58,500 आवंटित किए गए हैं. जबकि स्वास्थ्य उप-केंद्रों के सुचारू संचालन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 5,15,42,000 की राशि स्वीकृत की गई है.
जवाबदेही और पारदर्शिता पर सरकार की विशेष नजर
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से जारी इस आवंटन आदेश में वित्तीय अनुशासन और सेवा की गुणवत्ता पर जोर दिया गया है. जिसमें कहा गया है कि दवाओं और उपकरणों की खरीद ई-टेंडर या जेम पोर्टल के माध्यम से ही की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. जिलों में सिविल सर्जन को प्रत्येक महीने दवाओं की स्टॉक पंजी का स्वयं सत्यापन करना होगा. इसके अलावा, जिला स्तर पर एक वरीय चिकित्सा पदाधिकारी को ‘नोडल अधिकारी’ नामित किया गया है. जो दवाओं की उपलब्धता पर निरंतर नजर रखेंगे. स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी निकासी एवं व्ययन अधिकारी होंगे. उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे स्वास्थ्य केंद्रों के आधार पर व्यय का विवरण हर महीने की 7 तारीख तक विभाग को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं.



