Ranchi: झारखंड पुलिस महकमे में एक बार फिर प्रोन्नति को लेकर विसंगति का मामला सामने आया है. राज्य में पिछले 28 महीनों से सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) संवर्ग के कर्मियों की प्रोन्नति रुकी हुई है, जिससे पुलिसकर्मियों में निराशा है. मामला गृह विभाग के एक पुराने आदेश और हजारीबाग स्थित झारखंड पुलिस अकादमी में हुए इंडक्शन कोर्स से जुड़ा है.
क्या है पूरा मामला?
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मेमो संख्या-248, दिनांक 28 जनवरी 2016 के आलोक में वर्ष 2017 में जेपीए, हजारीबाग में दो सत्रों में 8 सप्ताह का इंडक्शन कोर्स आयोजित किया गया था. इस प्रशिक्षण को पूरा करने के बावजूद, वर्ष 2024 में जब प्रोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो इस कोर्स को करने वाले एएसआई संवर्ग के कर्मियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया.

दोहरा मापदंड: सब-इंस्पेक्टर को मिला लाभ, ASI वंचित
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास नियमों की दोहरी व्याख्या को लेकर सामने आ रहा है. पीड़ित कर्मियों का कहना है कि, सब-इंस्पेक्टर को प्रोन्नति जिन सब-इंस्पेक्टरों ने उसी वर्ष (2017) दो सत्रों में आयोजित इसी आठ सप्ताह के इंडक्शन कोर्स को पूरा किया था, उन्हें इसके आधार पर योग्य मानते हुए पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नति दे दी गई. दूसरी ओर, समान प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले एएसआई संवर्ग के कर्मियों को प्रोन्नति की रेस से बाहर कर दिया गया और उनके प्रशिक्षण को अमान्य या अपर्याप्त मान लिया गया.
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28 महीनों से रुका है प्रमोशन, कर्मियों में आक्रोश
पिछले 28 महीनों से एएसआई संवर्ग में प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है. कर्मियों का तर्क है कि जब प्रशिक्षण संस्थान प्रशिक्षण की अवधि (8 सप्ताह) और विभागीय आदेश (मेमो 248) एक ही थे, तो फिर दो अलग-अलग रैंक के अधिकारियों के लिए पात्रता के मापदंड अलग कैसे हो सकते हैं? इस प्रशासनिक विसंगति के कारण सैकड़ों एएसआई बिना किसी गलती के वित्तीय और पद जनित लाभों से वंचित हैं, जिससे पुलिस मुख्यालय के इस निर्णय पर अब सवाल उठने लगे हैं.
