Ranchi: झारखंड की सियासी फिजाओं में राज्यसभा चुनाव का बिगुल फूंकते ही राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. सूबे की दो राज्यसभा सीटों के लिए शह और मात का वो हाई-वोल्टेज ड्रामा आज यानी सोमवार (1 जून) से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है, जिसकी तपिश दिल्ली से लेकर रांची तक साफ महसूस की जा रही है. निर्वाचन आयोग की अधिसूचना जारी होते ही दोनों खेमों में गुणा-भाग और मोहरे सजाने का खेल तेज हो चुका है. एक तरफ जहां सत्ताधारी महागठबंधन अपनी तय जीत को लेकर आश्वस्त है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संख्या बल की कमी के बावजूद चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. यह चुनाव महज दो सीटों का दंगल नहीं है, बल्कि यह सूबे के दिग्गजों की साख, गठबंधन की एकजुटता और पर्दे के पीछे चलने वाली ‘क्रॉस वोटिंग’ की आशंकाओं की अग्निपरीक्षा भी है. इस चुनावी समर में दोनों खेमों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं.

चुनावी रणभेरी: तारीखों का पूरा गणित
झारखंड विधानसभा परिसर अब अगले कुछ दिनों तक सूबे का सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बनने जा रहा है. चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत 1 जून को अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ हो चुकी है. उम्मीदवार आगामी 8 जून तक अपने पूरे दलबल के साथ पर्चा दाखिल कर सकेंगे. इसके अगले ही दिन यानी 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी, जिसमें यह तय होगा कि कौन चुनावी रेस में टिका रहेगा और किसका पत्ता कटेगा. यदि किसी उम्मीदवार को अपने कदम पीछे खींचने हैं या किसी रणनीतिक समझौते के तहत नाम वापस लेना है, तो उसके लिए 11 जून की तारीख तय की गई है. इसके बाद असली मुकाबला 18 जून को होगा, जब सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इसी दिन (18 जून) शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी और देर रात तक नतीजे साफ हो जाएंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को 20 जून तक हर हाल में संपन्न करा लिया जाएगा.
विधानसभा में मुस्तैदी: नामांकन के नियम और सुरक्षा राशि
इस बार चुनाव को निष्पक्ष और सुचारू ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी पुख्ता तैयारियां की गई हैं. विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार को इस पूरी प्रक्रिया के लिए मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि उनकी मदद के लिए किरण सुमन बाखला को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है. उम्मीदवार विधानसभा स्थित रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर से सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक अपने नामांकन फॉर्म हासिल कर सकते हैं. सामान्य वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों को 10 हजार रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी. वहीं, दूसरी ओर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रत्याशियों के लिए यह राशि 5 हजार रुपये तय की गई है.
प्रस्तावक की जंग: निर्दलीयों के लिए कड़ी डगर
नियमों के मुताबिक, यदि कोई प्रत्याशी किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है, तो उसे अपने नामांकन पत्र को वैध बनाने के लिए कम से कम 9 विधायकों के लिखित समर्थन और प्रस्तावक की जरूरत होगी.असली चुनौती तो उन नेताओं के सामने है जो निर्दलीय तौर पर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं. एक निर्दलीय उम्मीदवार के लिए विधानसभा के भीतर से कम से कम 10 विधायकों को प्रस्तावक बनाना अनिवार्य कर दिया गया है.
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दिल्ली दरबार में लग रही हाजिरी
दिखने को तो सत्ताधारी महागठबंधन के पास दोनों सीटें झटकने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित संख्या बल मौजूद है, महागठबंधन की प्रमुख साझीदार कांग्रेस ने साफ तौर पर दो में से एक सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी ठोक दी है. कांग्रेस आलाकमान और सूबे के कद्दावर नेता इस मौके को हाथ से नहीं गंवाना चाहते. यही वजह है कि झारखंड कांग्रेस के कई दिग्गज नेता इन दिनों दिल्ली दरबार की परिक्रमा कर रहे हैं, ताकि आलाकमान के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दबाव बनाया जा सके. अब सारा दारोमदार और अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में है. जेएमएम (झारखंड मुक्ति मोर्चा) इस सीट को आसानी से कांग्रेस की झोली में देगी या खुद अपने पास रखकर अपनी ताकत का अहसास कराएगी, इस पर संशय बरकरार है. मुख्यमंत्री आवास पर कयासों का दौर जारी है और बंद कमरों में बैठकों का सिलसिला थमा नहीं है.
संख्या बल नहीं, फिर भी भाजपा के तेवर तीखे
इस पूरे चुनाव का सबसे रोमांचक मोड़ भाजपा का वो फैसला है, जिसने सबको चौंका दिया है. भाजपा और उसके सहयोगियों के पास जीत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा नहीं है, इसके बावजूद भगवा दल ने एक उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान कर दिया है. भाजपा की इस आक्रामक रणनीति के पीछे क्या कोई बड़ा सियासी ‘ऑपरेशन’ है या फिर विपक्ष को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाने की कोशिश, इसे लेकर कयास तेज हैं. इस चुनावी मंथन को अंतिम रूप देने और टिकट के दावेदारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए आगामी 6 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन नबीन रांची पहुंच रहे हैं. उनके रांची आते ही भाजपा कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें उम्मीदवार के नाम को फाइनल कर केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा जाएगा.
