रांची: झारखंड के सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में सेंधमारी कर करोड़ों रुपये के ‘वेतन घोटाले को अंजाम देने वालों की अब खैर नहीं है. राज्य सरकार के निर्देश पर सीआईडी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभाल ली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में नौ सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया है, जिसने फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है.

दोहरे मोर्चे पर शुरू हुई जांच:
राज्य सरकार ने इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए दो-स्तरीय जांच प्रणाली अपनाई है. पहला आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व वाली टीम मुख्य रूप से फर्जीवाड़े के आपराधिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी. इसमें अवैध निकासी के पीछे छिपे सिंडिकेट, फर्जी दस्तावेजों के खेल और इसमें शामिल सफेदपोश अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान की जाएगी. दूसरा वित्त विभाग के स्तर पर आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी इस बात की पड़ताल करेगी कि ट्रेजरी सॉफ्टवेयर में ऐसी कौन सी खामियां थीं, जिसका फायदा घोटालेबाजों ने उठाया.
जांच के मुख्य बिंदु: आखिर कहां हुई चूक?:
एसआईटी की जांच का दायरा केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में हुई सेंधमारी की भी पड़ताल की जाएगी. क्या यह घोटाला केवल कुछ क्लर्कों की मिलीभगत है या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा नेक्सस काम कर रहा है? ट्रेजरी के सुरक्षित माने जाने वाले सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कैसे की गई और कट कमीशन का खेल कैसे चलता रहा? वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये किन-किन फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और उन खातों का असली मालिक कौन है?
