झारखंड में जल योजनाओं का बेड़ा गर्क करने वाली दो बड़ी कंपनियों पर जिडको का चला चाबुक, एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट

Ranchi: झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जिडको) ने जल योजनाओं में लापरवाही, लेटलतीफी और अनुबंध की शर्तों की पालन नहीं करने...

JIDCO cracks down on two major companies that have sabotaged water projects in Jharkhand, blacklisting them for a year

Ranchi: झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जिडको) ने जल योजनाओं में लापरवाही, लेटलतीफी और अनुबंध की शर्तों की पालन नहीं करने वाली गढ़वा और रामगढ़ की जलापूर्ति योजनाओं में सुस्ती दिखाने वाली दो बड़ी कंपनियों एमएस शंभू सिंह और एमएस आरएमएन-श्री सुभा जेवी को एक साल के लिए डिबार (ब्लैकलिस्ट) कर दिया है. इन दोनों कंपनियों को शहरी विकास एवं आवास विभाग और जिडको के आगामी सभी टेंडर और प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है.

गढ़वा अर्बन वाटर सप्लाई—महज 30% वित्तीय प्रगति और ठप पड़ा काम

गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत घरों तक नल से जल पहुंचाने की अति-महत्वपूर्ण योजना दम तोड़ती नजर आ रही थी. एमएस शंभू सिंह को इस योजना के तहत कुल 10,484 हाउस सर्विस कनेक्शन देने थे. तय समयसीमा के 15 महीने बीत जाने के बाद भी एजेंसी ने सिर्फ 2,507 कनेक्शन ही दिए हैं. इसमें से भी पोर्टल पर केवल 1,890 कनेक्शन ही अपलोड किए गए हैं. भौतिक प्रगति 65.5% (जो मुख्य रूप से केवल सामग्री यानी मैटेरियल की आपूर्ति तक ही सीमित है) और वित्तीय प्रगति महज 30.66% ही रही.

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फैक्ट फाइल

• अनुबंध तिथि: 21 जनवरी 2025
• कार्य आदेश: 30 जनवरी 2025
• कुल समयसीमा: 3 महीने (30 अप्रैल 2025 तक कार्य पूरा होना था)
• अनुबंध मूल्य: 5,87,10,400 रुपए था.

रामगढ़ जलापूर्ति योजनाः नाकामी और कुप्रबंधन

दूसरी बड़ी कार्रवाई एम/एस आरएमएन-श्री सुभा जेवी पर की गई है, जिसे रामगढ़ नगर परिषद और छावनी बोर्ड रामगढ़ के लिए ‘रामगढ़ जल आपूर्ति योजना के संवर्द्धन और मजबूतीकरण’ का जिम्मा सौंपा गया था. कंपनी को 21 सितंबर 2023 को अनुबंध संख्या 591 के तहत यह कार्य सौंपा गया था. लेकिन कंपनी ने शुरुआत से ही अनुबंध के नियमों और तय मील के पत्थरों को हासिल करने में पूरी तरह लापरवाही बरती. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम निर्धारित लक्ष्यों से काफी पीछे चल रहा है. विभिन्न स्थानों पर ओवरहैड टैंकों का निर्माण या तो शुरू ही नहीं हुआ या उनकी प्रगति नगण्य है. डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाने और उससे जुड़े अन्य कार्य अधर में लटके हुए हैं. साइट पर पर्याप्त मात्रा में मजदूर, मशीनरी और तकनीकी संसाधनों को तैनात नहीं किया गया.

टर्मिनेशन के बाद डिबारमेंट की कार्रवाई

कंपनी को पहले शो-कॉज नोटिस (11 जनवरी 2024), इसके बाद फाइनल टर्मिनेशन नोटिस और फिर नए सिरे से कारण बताओ नोटिस (10 फरवरी 2026) जारी किए गए. कंपनी की ओर से दिए गए जवाबों को जिडको ने खारिज कर दिया क्योंकि वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे थे.

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डिबारमेंट की अवधि के दौरान कड़े प्रतिबंध

• ये फर्में स्वतंत्र रूप से या किसी संयुक्त उपक्रम कंसोर्टियम पार्टनर के रूप में जिडको द्वारा आमंत्रित किसी भी नई निविदा में भाग नहीं ले सकेंगी.
• यदि इन फर्मों से जुड़ा कोई पुराना टेंडर या मूल्यांकन प्रक्रिया विचाराधीन है, तो उस पर नियमानुसार समीक्षा कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
• इस डिबारमेंट को जिडको के आधिकारिक रिकॉर्ड में हमेशा के लिए दर्ज कर लिया गया है, जिसे भविष्य के हर सौदे और पत्राचार में आधार बनाया जाएगा.

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