Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) कार्यालय में CID और रांची पुलिस की संयुक्त छापेमारी के बाद राज्य का सियासी और छात्र आंदोलन का पारा चढ़ गया है. परीक्षा में लगातार हो रही कथित गड़बड़ियों और धांधली को अब अभ्यर्थी आर-पार के मूड में हैं. JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो और JPSC अभ्यर्थियों ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर साफ चेतावनी दी है कि यदि जांच केवल कागजी या लीपापोती साबित हुई, तो राज्यभर के छात्र सड़क पर उतरेंगे और दिल्ली के ‘जंतर-मंतर’ की तर्ज पर उग्र आंदोलन करेंगे.
JPSC और परीक्षा एजेंसी पर अभ्यर्थियों ने क्या लगाए आरोप
• अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस परीक्षा की OMR Sheet पर आयोग के अधिकृत सदस्यों के हस्ताक्षर तक गायब थे.
• हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अभ्यर्थियों के असामान्य और संदेहास्पद चयन पर सवाल उठाए गए.
• छात्रों का दावा है कि FRO परीक्षा की लगभग 350 और ACF परीक्षा की 150 OMR Sheet में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई है, जिसके साक्ष्य मीडिया को सौंपे जा चुके हैं.
• उत्तर प्रदेश और JPSC द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद JPSC ने ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट बनाने तक का जिम्मा इसी एजेंसी को दे रखा है.
छात्रों की प्रमुख मांगें
• एजेंसी के निदेशक सतपाल सिंह, रणधीर सिंह और मैनेजर मनोज तिवारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो.
• मैनेजर मनोज तिवारी खुद चार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर सफल हुए हैं, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है.
• ट्रांसफर के बावजूद पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की आयोग में संदिग्ध आवाजाही जांच के घेरे में लाई जाए.
छात्रों का अल्टीमेटम
• CID जांच एक तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.
• जेपीएससी और जेएसएससी में तत्काल व्यापक प्रशासनिक सुधार किए जाएं.
• विवादित एजेंसियों को हटाकर नई, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा एजेंसी की नियुक्ति की जाए.
