20 साल तक संविदा पर काम लेना गलत, DVC शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन यानी DVC के स्कूलों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी...

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन यानी DVC के स्कूलों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा है कि 20 वर्षों तक लगातार स्थायी प्रकृति का काम लेकर किसी कर्मचारी को संविदा पर रखना उचित नहीं माना जा सकता.

नियमितीकरण का आदेश

न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए DVC को सभी याचिकाकर्ता शिक्षकों की सेवा नियमित करने का आदेश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि नियमितीकरण का लाभ उस तारीख से दिया जाए, जब संबंधित शिक्षकों ने अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे किए थे.

चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी नियुक्ति

मामले में संजय कुमार झा, ईशा कुमारी, जय प्रकाश नारायण, शोभा पांडेय, बिमलेश दत्ता मिश्रा, शबनम परवीन और हरेंद्र कुमार सिंह समेत कई शिक्षकों ने याचिका दायर की थी. इन शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2002 से 2005 के बीच विज्ञापन जारी होने और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई थी. इसके बावजूद उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं दी गई थी.

स्कूलों की रीढ़ बने शिक्षक

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि वे PRT, TGT और PGT शिक्षक के रूप में लगातार काम कर रहे हैं और स्कूलों का संचालन काफी हद तक इन्हीं शिक्षकों पर निर्भर है. अदालत ने भी माना कि इतने लंबे समय तक लगातार सेवा देना यह साबित करता है कि काम स्थायी प्रकृति का है.

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DVC ने रखा अपना पक्ष

DVC की ओर से अदालत में कहा गया कि शिक्षकों की नियुक्ति केवल संविदा आधार पर हुई थी और नियमितीकरण का उन्हें कोई अधिकार नहीं है. निगम ने यह भी कहा कि कई पदों की संख्या बाद में कम कर दी गई और भविष्य में आउटसोर्सिंग की योजना बनाई गई है. साथ ही याचिकाओं को देरी से दाखिल किया गया बताया गया.

कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने DVC की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि DVC एक वैधानिक संस्था है और उसे आदर्श नियोक्ता की तरह व्यवहार करना चाहिए. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय तक संविदा पर कर्मचारियों से काम लेना शोषण की श्रेणी में आता है.

गर्मी की छुट्टियों के ब्रेक पर भी टिप्पणी

अदालत ने यह भी माना कि शिक्षकों की सेवा में गर्मी की छुट्टियों के दौरान जो छोटे-छोटे ब्रेक दिए जाते थे, वे केवल तकनीकी और कृत्रिम थे. कोर्ट ने कहा कि इन ब्रेक का उद्देश्य नियमितीकरण से बचना था और इससे कर्मचारियों की निरंतर सेवा समाप्त नहीं मानी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का भी हवाला दिया. अदालत ने कहा कि सरकारी संस्थाएं केवल अस्थायी का टैग लगाकर कर्मचारियों से वर्षों तक स्थायी काम नहीं करा सकतीं.

2016 और 2017 के आदेश रद्द

अंत में अदालत ने वर्ष 2016 और 2017 में DVC द्वारा नियमितीकरण से इनकार करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया और सभी याचिकाएं मंजूर कर लीं. अदालत ने निर्देश दिया कि सभी शिक्षकों को नियमित कर्मचारी मानते हुए सेवा से जुड़े सभी लाभ दिए जाएं.

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