Hazaribagh:आगामी खरीफ सीजन में सुखाड़ की आशंकाओं को देखते हुए जिले के किसानों को सुरक्षित और आधुनिक खेती का गुर सिखाने के लिए नगर भवन हजारीबाग में जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया. कृषि मंत्री के विशेष निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों को कम बारिश में भी बेहतर पैदावार लेने के लिए जागरूक करना और उन्हें अत्याधुनिक कृषि तकनीकों से लैस करना था. इस जिला स्तरीय महा-मंथन का विधिवत उद्घाटन संयुक्त रूप से जिला कृषि पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, जिला योजना एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी एवं कृषि विज्ञान केंद्र गोरियाकर्मा के वरीय वैज्ञानिकों ने दीप प्रज्वलित कर किया.

कम बारिश में मोटे अनाज और दलहन की खेती होगी वरदान, वैज्ञानिकों ने सुझाए उपाय
कार्यशाला के मुख्य सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने सुखाड़ की स्थिति में भी बम्पर उत्पादन प्राप्त करने के लिए उपयुक्त फसलों के चयन पर विशेष तकनीकी प्रकाश डाला. कृषि विज्ञान केंद्र गोरियाकर्मा के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. राघवन ने मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विपरीत मौसम और सुखाड़ की स्थिति में मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती सबसे अधिक लाभकारी और सुरक्षित साबित होती है. उन्होंने फसलों को विभिन्न रोगों एवं कीट-व्याधि के प्रकोप से बचाने के लिए पौधों के बीच उचित दूरी और बेहतर वायु संचार बनाए रखने की व्यावहारिक सलाह दी. इसके साथ ही उन्होंने कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली अरहर की उन्नत प्रजातियों, जैसे पूसा-16 एवं बिरसा अरहर-2 के अधिकतम उपयोग पर विशेष बल दिया, ताकि किसानों की लागत डूबे नहीं.
बूंद-बूंद पानी की महत्ता: टपक और फव्वारा सिंचाई से दूर होगा जल संकट
जल ही जीवन है और खेती का आधार है, इसी बात को रेखांकित करते हुए केवीके के दूसरे वरीय वैज्ञानिक डॉ. मुकेश तिवारी ने वर्षा जल संरक्षण के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला. उन्होंने किसानों को अपने खेतों और तालाबों में बारिश के पानी को संरक्षित कर संकट के समय सिंचाई हेतु उपयोग करने की पूरी तकनीक समझाई. डॉ. तिवारी ने सरकार की महत्वाकांक्षी विभागीय योजनाओं के अंतर्गत पी.डी.एम.सी.,टपक सिंचाई एवं फव्वारा सिंचाई तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की सलाह दी ताकि कम पानी में भी अधिक क्षेत्रफल की सिंचाई की जा सके. वहीं, भूमि संरक्षण पदाधिकारी ने तालाब जीर्णोद्धार एवं परकोलेशन टैंक जैसी जल संचयन की महत्वपूर्ण योजनाओं के माध्यम से वर्षा जल को सहेजने की बात कही, ताकि भूजल स्तर बना रहे और सुखाड़ के थपेड़ों के बीच भी उत्पादन की निरंतरता बनी रहे.
पैक्स सदस्य बनने से मिलेगा अनुदानित बीज, उद्यानिकी और मत्स्य पालन से बढ़ेगी अतिरिक्त आय
किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिला सहकारिता पदाधिकारी ने जिले के तमाम किसानों से पैक्स का सक्रिय सदस्य बनने का पुरजोर आह्वान किया, जिससे सभी को अनुदानित दर पर समय से उत्तम किस्म के बीज और ऋण उपलब्ध कराया जा सके. मत्स्य प्रसार पदाधिकारी ने मत्स्य पालन विभाग की विभिन्न लाभकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मछली पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनकी आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सके. इसके साथ ही, जिला उद्यान पदाधिकारी ने सब्जी की आधुनिक खेती, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस, पैक हाउस, मधुमक्खी पालन एवं मसाला खेती जैसी अभिनव योजनाओं पर मिलने वाली भारी-भरकम सरकारी सब्सिडी की विस्तृत और बिंदुवार जानकारी दी, जिसे सुनकर किसान काफी उत्साहित नजर आए.
ब्लॉकचेन तकनीक से सीधे किसानों तक पहुंचेगा बीज, पशुपालन योजनाओं की भी मिली जानकारी
योजनाओं के क्रियान्वयन पर सबसे बड़ी जानकारी देते हुए जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि विभाग द्वारा संचालित बिरसा बीज विनिमय योजना एवं बिरसा फसल विस्तार योजना के अंतर्गत जिले के पंजीकृत किसानों को 50 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक के बम्पर अनुदान पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. उन्होंने पारदर्शिता का हवाला देते हुए कहा कि दलहन, तिलहन, मिलेट यानी रागी और मक्का आदि फसलों के प्रमाणित बीज का वितरण चयनित क्लस्टरों में पूरी तरह से पारदर्शी ‘ब्लॉकचेन तकनीक’ के माध्यम से सीधे किसानों के बीच किया जाएगा ताकि बिचौलियों का खेल खत्म हो सके. इसके अतिरिक्त किसानों को पी.डी.एम.सी., स्वस्थ मृदा कार्ड , कृषि समृद्धि योजना एवं कुसुम योजना के लाभों से अवगत कराया गया. अंत में जिला पशुपालन पदाधिकारी ने पशुधन विकास, बकरा पालन एवं कुक्कुट पालन योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को अपनी आय दोगुनी करने के रास्ते सुझाए.
इस भव्य और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक ‘आत्मा’ हजारीबाग द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया, जबकि मंच का कुशल संचालन प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रजनीश आनंद ने किया. इस विशेष अवसर पर हजारीबाग जिले के सभी प्रखंडों से आए कृषक मित्र, प्रगतिशील कृषक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, जनसेवक, बीटीएम., एटीएम. सहित बहुत बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिला किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने इस कार्यशाला को सफल बनाया.
AlsoRead:पलामू: जमीन विवाद में चली गोली, एक की मौत
