koderma : वन क्षेत्र से खनन पट्टे की न्यूनतम 400 मीटर और क्रशर की 500 मीटर दूरी तय होने के बाद भी जिला के ज्यादातर पत्थर खदानों और क्रशर इकाइयों का कंसेंट टू ऑपरेट रद्द हो गया है. इससे कई जगहों पर खनन और क्रशिंग का काम ठप पड़ गया है. लेकिन इसी बीच स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे है कि बंदी के बावजूद कुछ खदानों से बड़े पैमाने पर बोल्डर की ढुलाई अब भी जारी है.
खनन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 36 खदानें वैध है. इनमें से फिलहाल केवल 20 से 25 खदानों से ही नियमित माइनिंग चालान काटे जा रहे है.विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि वन क्षेत्र से दूरी वाला नया नियम सिर्फ नई लीज पर लागू होगा. पुराने पट्टाधारियों को इससे छूट मिली हुई है.
बगैर वैध कागजात के चल रहा खनन
वहीं ग्रामीणों का सवाल है कि जिन खदानों के चालान ही नहीं निकल रहे, वहां से रोज दर्जनों हाइवा बोल्डर लेकर विभिन्न क्रशर तक कैसे पहुंच रहे है. उनका कहना है कि बिना वैध कागजात के खनिज का परिवहन सीधे खनन व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़ा करता है. खनन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खनिज के परिवहन के लिए माइनिंग चालान और अन्य जरूरी दस्तावेज अनिवार्य है. दस्तावेज के बिना ढुलाई मिलने पर विभागीय कार्रवाई बनती है. मामले को गंभीर बताते हुए स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, खनन, परिवहन और पुलिस विभाग से संयुक्त जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
