Lohardaga: लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर ‘वंदे मातरम्’ और संसद के मानसून सत्र को लेकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय गीत की मूल भावना से खिलवाड़ कर रही है और संसद की गरिमा भी प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और इसे किसी भी राजनीतिक दल का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए.
‘वंदे मातरम्’ की मूल भावना से छेड़छाड़ का आरोप
सुखदेव भगत ने कहा कि संविधान सभा में व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ‘वंदे मातरम्’ के जिन अंशों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था, वह निर्णय देश की विविधता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखकर लिया गया था. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा का प्रतीक रहा है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रीय गीत के नाम पर उसकी मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है.
राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
कांग्रेस सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विषयों पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को संवैधानिक मर्यादाओं और देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए. ऐसे मुद्दों पर संवेदनशीलता और सर्वसम्मति के साथ आगे बढ़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप होगा.
मानसून सत्र को लेकर भी साधा निशाना
सांसद ने संसद के मानसून सत्र को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहां जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए. उनका आरोप है कि विपक्ष की बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का प्रयास किया जा रहा है.
संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील
सुखदेव भगत ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू से अपील करते हुए कहा कि वे सत्तापक्ष के सांसदों को सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है.उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब जनहित के मुद्दे उठाते हैं तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है. सांसद ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती पक्ष और विपक्ष दोनों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है.
