Ranchi: झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी महावीर सिंह के लंबे समय से चले आ रहे विभागीय और कानूनी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि उनके वेतनमान में की गई कटौती का दंड अब अनिश्चितकाल तक प्रभावी नहीं रहेगा.
मामले की पृष्ठभूमि और अदालती प्रक्रिया
महावीर सिंह जब गढ़वा के रमकण्डा (अतिरिक्त प्रभार चिनिया और भण्डरिया) तथा गिरिडीह के बगोदर में बीडीओ के पद पर तैनात थे, तब उन पर कुछ गंभीर आरोप लगे थे. विभाग ने 2013 में उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की और जांच में दोषी पाए जाने के बाद साल 2015 में उनके वेतनमान को घटाकर निचले स्तर पर करने का दंड सुनाया था.
इस दंड के खिलाफ उन्होंने पहले झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से उनकी याचिका खारिज हो गई. इसके बाद उन्होंने लेटर पेटेंट अपील (LPA) दायर की, जिसे भी 2023 में खारिज कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु
• समय सीमा तय: वेतनमान में कटौती का दंड केवल 31 दिसंबर, 2025 तक ही प्रभावी माना जाएगा.
• पेंशन में सुधार: चूंकि श्री सिंह साल 2018 में ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए जनवरी 2026 से उनकी पेंशन की गणना उस वेतनमान के आधार पर की जाएगी, जो सजा मिलने से पहले उन्हें मिल रहा था.
• बकाया राशि नहीं: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश के बाद उन्हें पिछले किसी भी एरियर (बकाया राशि) का भुगतान नहीं किया जाएगा.
